बारिश से फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा, मुजफ्फरपुर में 6 डूबे

मुजफ्फरपुर (बिहार) – पिछले डेढ़-दो महीने से बाढ़ की मार झेल रहे उत्तर बिहार के जिलों में बदले मौसम ने एकबारगी बाढ़ पीड़ितों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम ने रविवार को करवट ली, सबेरे से मुजफ्फरपुर व आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी मध्यम बारिश से एक बार फिर थमी नदियों के उफनाने का खतरा है। फिलहाल आपदा प्रबंधन व जल संसाधन विभाग की टीमों को नदियों के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। इधर, जानलेवा बने बाढ़ के पानी ने आधा दर्जन लोगों की जान ले ली। डूबने से तीन बहनों समेत छह लोगों की मौत मुजफ्फरपुर जिले में हो गई। सबके शव को बरामद कर लिया गया। सकरा में दो सगी व एक चचेरी बहन बाढ़ के पानी में बह गई। बोचहां में बुजुर्ग सड़क पार करते समय बाढ़ में बह गए।
सकरा प्रखंड के बाजी बुजुर्ग गांव में तीन बहन छोटेलाल साह की पुत्री अंजली कुमारी (17) व रजनी कुमारी (13) और प्रदीप साह की 16 वर्षिया पुत्री नन्दनी कुमारी की मौत डूबन से हो गई। तीन बहनों के एक साथ डूबकर मौत की खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। तीनों बहनें मवेशी के लिए चारा लाने निकलीं थीं। वहीं औराई थाना की रामपुर पंचायत के संभुता डीह गांव के छोटे सहनी का 11 वर्षीय पुत्र किन कुमार बाढ़ के पानी में डूब गया। वह शौच के लिए निकला था। दूसरी तरफ नौका दुर्घटना में डूबी अमृता कुमारी का शव सुबह मधुवन प्रताप गांव के पास बागमती नदी में उपलाता मिला। वहीं बोचहां की रामपुर जयपाल पंचायत के रुदहां सनाठी गांव के वार्ड नौ के 65 वर्षीय राजदेव मांझी की मौत चौपार गांव में बाढ़ के पानी में डूबकर हो गई। वे चौपार गांव से गुजरने के दौरान पानी भरे सड़क पर कंधे पर साइकिल उठाकर सड़क पार कर रहे थे इसी दौरान पानी में बह गए।
उधर, सरैया के जगन्ननाथ स्वामी मंदिर बसंतपुरपट्टी के समीप पोखर में डूबने से युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान बसंतपुर पट्टी के रंजीत साह (27) के रूप में हुई। वह कल शाम घर से निकला था। स्थानीय लोगों का कहना था कि संभवतः पोखर के पास चचरी पुल पार करने के दौरान पैर फिसल गया होगा और पोखर में डूब गया।
मुजफ्फरपुर जिले की बड़ी तीन नदियों के जलस्तर में कमी के बावजूद बाढ़ प्रभावित अधिकांश इलाकों की स्थिति खराब है। छोटी नदियां तबाही मचा रही हैं। बाया, झाझा, कदाने जैसी नदियों से चार प्रखंड की दर्जनों पंचायत प्रभावित हैं। सकरा, कुढ़नी, सरैया, पारू आदि इलाके में इन नदियों से काफी क्षति हुई है। सरैया प्रखंड की गिंजास पंचायत में बाया व झाझा नदी के पानी ने भारी तबाही मची है। पूरे पंचायत बाढ़ में बाढ़ का पानी फैला हुआ है। इसके कारण जन जीवन अस्त व्यस्त है। सैकड़ों परिवार मवि, जैतपुर, उच्च वि. जैतपुर, बसरा गंडक आईबी, गिंजास पुस्तकालय स्कूल, जागिरिया में सड़क किनारे आदि जगहों पर शरण लिए हुए हैं। गांव के पैक्स अध्यक्ष रामबाबू यादव, राकेश कुमार यादव, राजेश मालाकार आदि ने बताया कि वर्षों बाद यहां इतनी भयावह स्थिति हुई है।
वहीं सकरा प्रखंड की दस पंचायत कदाने नदी की बाढ़ से तबाही झेल रही है। सबहा से बारियापुर जाने वाली मुख्य सड़क, एनएच 28 से दोनमा चौक, सोनबरसा से बरियारपुर, सुजावलपुर से पातेपुर जाने वाली सड़कों पर से अब भी बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं उतरा है। वहीं टूटे तिरहुत नहर से निकला पानी मुरौल व सकरा की कई पंचायतों में तबाही का सबब बना हुआ है। अभी सकरा में एनएच 28 पर दर्जनों लोग शरण लिए हुए हैं।

 

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