- गनिंग फॉर द गॉडमैन नामक पुस्तक आईपीएस अजय लाम्बा ने लिखी है।
- साधारण महिला ठान ले तो बड़े से बड़े व्यक्ति को सजा मिल सकती है।
- पिछले आठ वर्ष से राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं आसाराम।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार केअपराध में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कथावाचक आसाराम बापू पर अब आगामी 5 सितम्बर को एक पुस्तक प्रकाशित होने जा रही है। इस पुस्तक को बलात्कार केस के जांच अधिकारी अजय पाल लाम्बा ने लिखा है। मौजूदा समय में लाम्बा जयपुर में डीजीआई के पद पर कार्यरत है। पुस्तक का नाम गनिंग फॉर द गॉडमैन रखा गया है। इस पुस्तक के बारे में 23 अगस्त को मेरी बात अजयपाल लाम्बा से हुई। लाम्बा ने बताया कि 250 पृष्ठों वाली पुस्तक का मूल्य पांच सौ रुपए रखा गया है। 5 सितम्बर को यह पुस्तक अंग्रेजी भाषा में जारी होगी, लेकिन जल्दी ही पुस्तक का हिन्दी संस्करण भी आएगा। पुस्तक का कोई विमोचन समारोह नहीं होगा। चूंकि मैं अभी सराकारी सेवा में हूं, इसलिए पुस्तक के प्रकाशन के लिए राज्य सरकार से विधिवत अनुमति भी ली है। समाज में खास कर महिलाओं में जागृति के उद्देश्य से यह पुस्तक मैंने लिखी है। चूंकि मैं इस केस का जांच अधिकारी रहा, इसलिए पूरे प्रकरण का बारीकी के साथ अध्ययन किया है। अपने अनुभवों के आधार पर ही इस पुस्तक को लिखा है। मैं उस दौर से भी गुजरा हंू जब मेरी जांच टीम को जान से मारने की धमकियां मिल रही थी तथा कुछ गवाहों की मौत भी हो रही थी। आरोपी आसाराम को सजा दिलवाने में हमें अनेक सबूत जुटाने पड़े। बलात्कार की शिकार युवती आखिर तक अपनी बात पर टिकी रही। इसीलिए आसाराम को आजीवन कारावास हुआ। अदालत ने असाराम के साथ साथ शरद और शिल्पी को भी बीस बीस वर्ष की सजा दी है। शरद अभी भी आसाराम के साथ जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। पुस्तक के शीर्षक गनिंग फॉर द गॉडमैन से पता चलता है कि देश में धर्म के नाम पर क्या क्या हो रहा है? यह एक ऐसे संत की कहानी है जिसे लोग भगवान मानते हैं। जब किसी व्यक्ति को लाखों लोग भगवान मानने लगे तो उसे धर्म के अनुरूप ही आचरण करना चाहिए। ऐसा व्यक्ति यदि धर्म के विपरीत आचरण करेगा तो फिर लोगों का विश्वास उठ जाएगा। पुस्तक बलात्कार के केस पर वैधानिक पहलुओं की तो जानकारी दी गई है साथ ही यह बताया गया है कि आरोपी को अंजाम तक कैसे पहुंचाया गया। आसाराम जैसे ताकतवर व्यक्ति के खिलाफ सबूत जुटाने और फिर अदालत के समक्ष रखने का काम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पूरी टीम ने मेहनत की और परिणाम सब के सामने है। लाम्बा ने कहा कि यह पुस्तक मैंने प्रसिद्धी पाने के लिए नहीं लिखी है। मेरा उद्देश्य लोगों को जागरुक करना है तथा महिलाओं की ताकत को उजागर करना है। लाम्बा ने बताया कि अगस्त 2013 में आसाराम के केस की जांच की जिम्मेदारी मिली थी। हमारी टीम ने आसाराम को आश्रम से गिरफ्तार भी किया। गिरफ्तारी के हालातों का जिक्र भी पुस्तक में है। 25 अप्रैल 2018 को अदालत ने आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनार्ई। यह बात अलग है कि आसाराम ने बलात्कार के आरोप को कभी भी स्वीकार नहीं किया, लेकिन हमने जो सबूत जुटाए उनके आधार पर आसाराम को सजा मिली। अदालत ने भी आसाराम के कृत्य को समाज विरोधी माना। लाम्बा ने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक समाज में जागृति लाने का काम करेगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में पीडि़ता ने आसाराम के विरुद्ध दिल्ली में शिकायत दर्ज करवाई थी। दिल्ली पुलिस ने जीरो नम्बर की एफआईआर दर्ज कर राजस्थान सरकार को भिजवा दी। तब मुख्यमंत्री के पद पर अशोक गहलोत ही कार्यरत थे। चूंकि बलात्कार की घटना जोधपुर में हुई थी, इसलिए जोधपुर में ही मुकदमा दर्ज किया गया।







