जयपूर – राजस्थान में 27 हजार पंचायत सहायक कर्मी दर दर भटकने को मजबूर हैं। वर्ष 2007 में विद्यार्थी मित्र के तौर पर शैक्षिक कार्य के लिए संविदा पर भर्ती की गई थी। लेकिन बाद में पंचायत सहायक के रूप में तब्दीली कर दी गई। इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि जब तृतीय श्रेणी के शिक्षक को 25 हजार रुपए से भी ज्यादा का वेतन मिलता है, तब पंचायत सहायक को प्रतिमाह मात्र छह हजार रुपए दिए जा रहे हैं। यह राशि नरेगा श्रमिक के बराबर है। हाल ही में सरकार ने जो आदेश निकाला है, उससे तो पंचायत सहायकों को वेतन मिलना भी मुश्किल हो गया है। पिछले दो माह से पंचायत सहायकों को छह हजार रुपए वाला वेतन भी नहीं मिला है। सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि ग्राम पंचायतें अपनी निजी आय से पंचायत सहायकों के वेतन का भुगतान करें। सरकार के इस आदेश की पालना अधिकांश ग्राम पंचायतें नहीं कर रही है। सरपंच और ग्राम पंचायत के सचिव निजी आय से पंचायत सहायकों का वेतन देने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यह बात अलग है कि ग्राम पंचायतें ऐसे कर्मचारियों से विभिन्न कार्य करवा रहे हैं। अपनी दुर्दशा को लेकर पंचायत सहायकों ने कई बार प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया है, लेकिन अब सरकार में पंचायत सहायकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गंभीर बात तो ये है कि ऐसे कार्मिक पिछले 15 वर्षों से संविदा पर ही कार्य कर रहे हैं। एक ओर श्रम कानूनों के तहत सरकार निजी क्षेत्र में श्रमिकों को सुविधा देने के लिए मालिकों पर दबाव बनाती हैं, लेकिन वहीं स्वयं के 27 हजार कार्मिकों को 15 वर्ष बाद भी संविदा पर रखा हुआ है। पंचायत सहायकों के वेतन में बढ़ोत्तरी स्थाई नौकरी आदि को लेकर संघर्ष करने वाले प्रतिनिति कमल टेलर ने बताया कि अब प्रदेशभर में पंचायत सहायक सामूहिक तौर पर सरकार को अपना इस्तीफा देने पर विमर्श कर रहे हैं। यदि 15 वर्ष बाद भी मात्र 6 हजार रुपए वेतन मिलता है तो यह किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए बेहद शर्मनाक है। पंचायत सहायक सरकार में बंधुआ मजदूर की तरह काम करने को मजबूर है। पंचायत सहायकों के आंदोलन के संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9413844235 पर कमल टेलर से ली जा सकती है।






