जयपूर – यह माना कि कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से अखबारों का प्रकाशन मुश्किल से हो रहे हैं। बड़े बडे अखबार समूह के मालिक लगातार छंटनी कर रहे हैं। अखबार निकलने के लिए वो सब कुछ किया जा रहा है, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो। सम्पादकों रिपोर्टरों आदि को भी विज्ञापन एकत्रित करने की जिम्मेदारी दे दी है। यही वजह है कि हर मौके पर विज्ञापन परिशिष्ट निकाल कर नेताओं के विज्ञापन लगाए जा रहे हैं। अजमेर के प्रमुख अखबारों ने 19 जून को शहीदों का बलिदान याद रखेगा हिन्दुस्तान और वतन पर कुर्बान रणबांकुरों को नमन जैसे शीर्षक आधा और पूरा पेज में प्रकाशित किया है। गत 16 जून को लद्दाख सीमा पर जो भारतीय सैनिक शहीद हुए उनके फोटो के साथ विज्ञापन देने वाले नेता का फोटो भी प्रकाशित किया गया है। यह बेहद ही अफसोसनाक बात है कि भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के फोटो हंसते हुए है। समझ में नहीं आता कि ऐसे नेता शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं या फिर खुशी जता रहे हैं। शर्मनाक बात तो यह है कि ऐसे नेताओं में अजमेर भाजपा के बड़े पदाधिकारी भी शामिल है। अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से राहुल गांधी के 50वें जन्मदिन पर जो विज्ञापन दिया गया है उसे भी जवानों की शहादत से जोड़ दिया गया है। राहुल गांधी के फोटो के साथ ही रणबांकुरों को नमन भी कर दिया गया है। इसी विज्ञापन में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के हंसते हुए फोटो है। भाजपा और कांग्रेस के नेता क्या संदेश देना चाहते हैं, यह तो वो ही जाने। हालांकि अखबार में प्रकाशित होने वाली सामग्री की जिम्मेदारी सम्पादकों की होती है, लेकिन जब हर स्थिति में राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य हो, तब शहीदों को श्रद्धांजलि वाले विज्ञापनों में नेताओं के हंसते हुए फोटो ही प्रकाशित होंगे। आखिर ऐसे फोटो की वजह से नेता दो चार हजार रुपए का भुगतान कर देगा। यदि एक पृष्ठ के विज्ञापन में 25 नेताओं के फोटो लगाकार शहीदों को श्रद्धांजलि दे दी तो अखबार मालिक और सम्पादक के पास 50 हजार रुपए से ज्यादा की राशि जमा हो जाएगी। जब जवानों की शहादत को भी कमाई का जरिया बना लिया जाए, तब हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो अखबार मालिक और सम्पादक अपनी कलम से सीधे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सलाह और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हिदायत देते हैं, उन्हीें के अखबारों में शहीदों को श्रद्धांजलि वाले पृष्ठ पर नेताओं के हंसते हुए फोटो प्रकाशित होते हैं। एक ओर शहीदों के परिजनों की आंखों से आसूं निकल रहे हैं तो दूसरी ओर अखबारों में नेताओं के हंसते हुए फोटो छप रहे हैं।






