- सीएम अशोक गहलोत की गोद में बैठ कर सचिन पायलट को संतुष्ट नहीं कर सकते माकन।
- अजमेर में शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष जारौली ने भी गहलोत सरकार की प्रशंसा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अजय माकन इन दिनों राजस्थान में संभाग स्तर पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। माकन ने 9 सितम्बर को अजमेर तथा 10 सितम्बर को जयपुर संभाग के कार्यकर्ताओं से संवाद किया। दोनों ही स्थानों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के गुटों में नजर आए। अजमेर में तो पायलट के समर्थकों ने गहलोत समर्थकों के पोस्टर बैनर तक फाड़ दिए। कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस पकड़ करले गई। हालात तब और बिगड़ गए जब पायलट समर्थक विधायक राकेश पारीक सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गंज पुलिस स्टेशन पर धरना देकर बैठ गए। पारीक ने थाने में ही आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है। लेकिन पारीक के धरने के बाद भी पायलट समर्थकों को नहीं छोड़ा गया। तब पारीक ने प्रभारी महासचिव अजय माकन के समक्ष नाराजगी जताई। पारीक का कहना रहा कि यदि हमारे समर्थकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही हुई तो फिर कार्यकर्ताओं में और नाराजगी बढ़ेगी। पारीक की नाराजगी को देखते हुए अजय माकन ने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को निर्देश दिए कि कार्यकर्ताओं को तत्काल छुड़वाया जाए। जिस पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कपड़े उतरवा कर थाने के लॉकअप में बंद कर दिया था, उसी पुलिस ने मंत्री का फोन आने पर कार्यकर्ताओं को सम्मान के साथ विदा किया। इतने बड़े घटनाक्रम को अजय माकन कार्यकर्ताओं का उत्साह बता रहे हैं। 10 सितम्बर को भी जयपुर में माकन के सामने पायलट समर्थकों ने गहलोत सरकार के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद भी माकन कह रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस मजबूत हो रही है। असल में अजय माकन को अपनी छवि की चिंता हो रही है। सब जानते हैं कि राहुल गांधी की दखल से माकन को रातों रात कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया और फिर हाथों हाथों राजस्थान जैसे प्रदेश का प्रभारी। माकन को राजस्थान में गहलोत और पायलट के बीच समन्वय बैठाने की जिम्मेदारी दी गई। अजय माकन नहीं चाहते हैं कि संभाग स्तर के संवाद में कार्यकर्ताओं के बीच झगड़ा फसाद हो। यदि ऐसा होता है तो फिर माकन के नेतृत्व पर भी सवाल उठेंगे। लेकिन अजय माकन सीएम अशोक गहलोत की गोद में बैठ कर सचिन पायलट और उनके समर्थकों को खुश करना चाहते हैं। जबकि पायलट और उनके समर्थकों का मुकाबला गहलोत से ही है। माकन का अभी तक बर्ताव बताता है कि वे सीएम गहलोत के इशारे पर ही भूमिका निभा रहे हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो संवाद के समय प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा उपस्थित नहीं रहते। अजमेर के संवाद में तो माकन के साथ मंच पर डोटासरा और दो मंत्री भी बैठे। यानि माकन पर गहलोत का शिकंजा पूरी तरह कसा हुआ था। ऐसे हालातों की वजह से ही पायलट के समर्थक सड़कों पर नाराजगी जता रहे हैं। सचिन पायलट के भी अब समझ में आ गया है कि माकन का संवाद एक तरफा है। इसलिए पायलट ने तो अजमेर और न जयपुर के संवाद में आए। पायलट को उम्मीद थी कि सात सितम्बर को उनके जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों का माकन पर कोई असर पड़ेगा, लेकिन माकन अभी भी गहलोत के साथ खड़े हैं। ऐसे में दोनों के बीच समन्वय होना मुश्किल है। अब देखना होगा कि पायलट का अगला कदम क्या होता है।
जारौली ने भी गहलोत की प्रशंसा की:
बताया जाता है कि अजमेर स्थित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. डीपी जारौली कांग्रेस के महासचिव माकन के पुराने मित्र हैं। यही वजह रही कि अजमेर आगमन पर माकन ने ही जारौली को मिलने बुलाया। माकन ने जारौली से ही भी फीडबैक लिया। जारौली ने इस अवसर पर गहलोत सरकार की जमकर प्रशंसा की। माकन को बताया कि सरकार के सहयोग से बोर्ड ने 21 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा कोरोना काल में करवाई। जारौली ने प्रदेशाध्यक्ष और शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यशैली की प्रशंसा भी की। माकन ने जारौली को जो सम्मान दिया उससे कांग्रेस की राजनीति जारौली का रुतबा बढ़ गया है।







