अजमेर के मास्टर प्लान को सही तरीके से लागू करने का जिम्मा अब एडीए आयुक्त रेणु जयपाल पर।

  • तीसरी बार फिर मांगी आपत्तियां।
  • समान नीति बने-पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत।
  • खसरा प्लान बना कर मास्टर प्लान की क्रियान्विति हो-पूर्व अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा।
  • विसंगतियों से भरे मास्टर प्लान के बाद भी अजमेर बन रहा है स्मार्ट सिटी।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राज भाजपा का हो या कांग्रेस का लेकिन पिछले दस वर्र्षों से अजमेर के मास्टर प्लान की विसंगतियों को दूर नहीं किया जा सका है। यही वजह है कि अजमेर का विकास रुका हुआ है। इसे विश्व का आठवां आश्चर्य ही कहा जाएगा कि जिस अजमेर शहर का मास्टर प्लान ही विसंगतियों से भरा है, उस शहर को दो हजार करोड़ रुपए खर्च कर स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा है। चूंकि यह पैसा भारत सरकार का है, इसलिए राजस्थान सरकार के अफसरों को खर्च करने में कोई दर्द नहीं होता। अफसर अपनी मर्जी से योजना बनाते हैं ओर फिर क्रियान्विति करते हैं। अफसर का तबादला होने पर योजना भी बदल जाती है। स्मार्ट सिटी की योजनाएं बनने और फिर बंद होने की जांच की जाए तो अफसरों की कार्यशैली की पोल खुल सकती है। मास्टर प्लान प्रभावी नहीं होने से आम व्यक्ति परेशान हैं। आवासीय भूमि पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तो बन गए हैं, लेकिन अब सीज होने की तलवार लटकी हुई है। अजमेर के वैशाली नगर के मुख्य मार्ग से मास्टर प्लान की विसंगतियों को समझा जा सकता है। इस 120 फिट चौड़े मार्ग के दोनों ओर किसी भूखंड को कमर्शियल कर रखा है तो किसी को आवासीय। सवाल उठता है कि जब पूर्व में आवासीय भूखंड को कमर्शियल कर दिया गया तो अब क्यों नहीं किया जा रहा है। अजमेर में ऐसे ऐसे शातिर पटवारी या अन्य राजस्व कर्मी बेठे हुए हैं जो मास्टर प्लान में भी बदलाव करने से नहीं हिचकते। यदि वैशाली नगर के मुख्य मार्ग की विसंगतियों को ही दूर कर दिया जाए तो अजमेर का विकास तेजी से हो सकता है। अब चूंकि अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त के पद पर तेज तर्रार आईएएस रेणु जयपाल आ गई हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए कि अजमेर के लोगों को राहत मिलेगी। सुश्री जयपाल अजमेर के गली मोहल्लों से अच्छी तरह वाकिफ है और उन्हें अजमेर के लोगों की परेशानी भी पता है। प्रशासनिक क्षेत्र में रेणु की छवि ईमानदार और सख्त मिजाज वाली मानी जाती है। यदि रेणु जनहित में कोई बड़ा निर्णय लेंगी तो उसका राज्य सरकार में भी सम्मान होगा। यही वजह है कि अब एडीए ने तीसरी बार मास्टर प्लान पर आपत्तियां मांगी है। रेणु ने शहर के जागरुक लोगों से आग्रह किया है कि वे अपनी आपत्तियां और सुझाव 9 अक्टूबर तक एडीए कार्यालय में जमा करवा दें। जिन्होंने पूर्व में आपत्तियां दी हैं, वे भी नए सीरे से आपत्तियां दर्ज करवाएं। रेणु ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि इसी वर्ष अजमेर के मास्टर प्लान को प्रभावी तरीके से लागू कर दिया जाए। इससे आवासीय भूमि पर कॉमर्शियय निर्माण की समस्या भी खत्म हो जाएगी। रेणु ने शहर के जागरुक नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि अजमेर के विकास के लिए वे हमेशा तत्पर हैं।
समान नीति बने-गहलोत:
मास्टर प्लान की विसंगतियों दूर नहीं होने पर पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अफसोस जताया। गहलोत ने कहा कि गत भाजपा शासन में विसंगतियों को दूर करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि निर्माण की स्वीकृति देने और भूरूपांतरण करने की समान नीति होनी चाहिए। वैशाली नगर का मुख्य मार्ग औसतन 120 फिट चौड़ा है, लेकिन इस मार्ग के दोनों ओर किसी भूखंड को कमर्शियल तो किसी को आवासीय दिखा दिया गया है। यह कृत्य राजस्व विभाग के कार्मिकों का है। किसी भी मार्ग पर भूरूपांतरण और निर्माण की समान नीति होनी चाहिए। उन्होंने माना की मास्टर प्लान की विसंगतियों की वजह से ही अजमेर का विकास अवरुद्ध हो रहा है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब मदार गेट, केसरगंज, नला बाजार, कचहरी रोड, नया बाजार आदि पूरी तरह व्यावसायिक हैं तो फिर यहां व्यावसायिक निर्माणों की अनुमति क्यों नहीं दी जाती?
खसरा प्लान बनाया जाए-हेड़ा:
वर्ष 2016 से 2018 तक अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे शिव शंकर हेड़ा ने कहा कि मास्टर प्लान की विसंगतियों को दूर करने का काफी प्रयास किया गया था। लेकिन मास्टर प्लान में इतनी गड़बड़ियाँ थी कि उनके कार्यकाल में विसंगतियों को दूर नहीं किया जा सका। वे चाहते थे कि पहले खसरा प्लान बने यानि खसरे के अनुरूप जमीन की किस्म तय हो। हेड़ा ने इस बात पर अफसोस जताया कि अजमेर में नीति खातेदारी की भूमि को ओसियत घोषित कर दिया गया, जबकि ओसियत का निर्धारण सिर्फ सरकारी योजना में ही होता है। हेड़ा ने कहा कि अजमेर के जो मार्ग 80 फिट चौड़े हैं, उनके दोनों ओर सरकार के नियमों के अनुरूप वाणिज्यिक निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए। हेड़ा ने कहा कि प्राधिकरण की मौजूदा आयुक्त रेणु जयपाल अजमेर की ही निवासी हैं, इसलिए उम्मीद की जाती है कि वे मास्टर प्लान की समस्या का समाधान करवाएंगी। मैं अपने अनुभव प्राधिकरण के साथ सांझा करने को तैयार हंू।

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