मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक माह तक होम क्वारंटीन होने के राजनीतिक मायने भी हैं।

  • प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन दो दिन के संवाद के बाद दिल्ली लौटे। नहीं हुई गहलोत और पायलट से मुलाकात।
  • अजय माकन के लिए आसान नहीं है दोनों गुटों में समन्वय करवाना।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान की कांग्रेस की राजनीति में चल रहे सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के गुटों में समन्वय करवाने के लिए 8 सितम्बर की रात को प्रदेश के प्रभारी महासचिव अजय माकन जयपुर पहुंचे। माकन के जयपुर पहुंचने के साथ ही सीएम गहलोत की ओर से घोषणा की कि वे अगले एक माह तक सीएमआर में किसी से भी मुलाकात नहीं करेंगे। मुलाकात नहीं करने का कारण कोरोना संक्रमण को बताया गया। यानि सीएम गहलोत अब सात अक्टूबर तक सरकारी घर पर ही क्वारंटीन रहेंगे। यह बात अलग है कि इन दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए गहलोत सरकारी कामकाज करते रहेंगे।

सीएम गहलोत होम क्वारंटीन होने को भले ही कोरोना संक्रमण का खतरा बताएं, लेकिन इससे कांग्रेस में बेचेनी हैं। प्रभारी महासचिव माकन 8 सितम्बर की रात को जयपुर आए और 11 सितम्बर को सुबह दिल्ली लौट गए। इन तीन रात और दो दिन में माकन की मुलाकात सीएम गहलोत से नहीं हुई। जबकि माकन ने 9 सितम्बर को अजमेर संभाग और 10 सितम्बर को जयपुर संभाग के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। दोनों ही स्थानों पर हंगामा हुआ। साफ नजर आया कि राजस्थान में कांग्रेस में दो गुटों में बंटी हुई है। जब माकन ने संवाद किया तब सचिन पायलट भी प्रदेश में नहीं रहे। पायलट 7 सितम्बर को ही दिल्ली चले गए। पायलट के जयपुर आने की कोई सूचना नहीं है।

संभाग स्तर पर संवाद कर अजय माकन दोनों गुटों में समन्वय कैसे करवाएंगे, यह तो माकन ही बता सकते हैं, लेकिन यह सही है कि जब तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट में समन्वय नहीं होगा, तब तक कांग्रेस में दो गुट बने रहेंगे। एक के होम क्वारंटीन होने और दूसरे के दिल्ली चले जाने से नहीं लगता कि दोनों में समन्वय होगा। दोनों नेताओं के इस रवैये से अजय माकन की परेशानियां और बढ़ गई है। माकन के सामने सबसे बड़ी चुनौती समन्वय करवाने की ही है। जब दोनों ही नेताओं को अजय माकन से मिलना भी पसंद नहीं आ रहा है, तब अकेले माकन क्या करेंगे? हालांकि माकन ने अभी तक किसी भी गुट की बुराई नहीं की है। यह बात अलग है कि माकन का झुकाव गहलोत गुट के साथ है। इसीलिए संभाग स्तर के संवाद कार्यक्रमों में माकन ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को अपने साथ बैठाए रखा। असल में गहलोत नहीं चाहते थे कि उनका कोई गुट होने की चर्चा हो। वे सचिन पायलट गुट के मुकाबले अशोक गहलोत गुट के होने की चर्चा भी पसंद नहीं करते हैं। गहलोत का मानना है कि पायलट और उनके समर्थक विधायको के बगैर भी कांग्रेस सरकार चल सकती है।
प्रदेश में है सात संभाग:
प्रदेश में सात संभाग हैं, माकन ने अभी सिर्फ जयपुर और अजमेर संभाग के कांग्रेस के पदाधिकारियों से संवाद किया है। दोनों ही संभागों में माकन को कांग्रेस के दो गुट देखने को मिले हैं। माकन तो अभी जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर तथा भरतपुर संभाग में भी संवाद करना है। माना जा रहा है कि इन पांचों संभागों में ज्यादा गुटबाजी देखने को मिलेगी। सबसे बुरे हालात भरतपुर और कोटा में देखने को मिलेंगे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here