प्रभारी महासचिव अजय माकन ने मंत्रियों से अपने प्रभार वाले जिलों में कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ प्रतिमाह बैठक करने के निर्देश दिए हैं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को टोंक और सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी को भरतपुर जिले का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन के निर्देशों के अनुसार सभी प्रभारी मंत्रियों को प्रतिमाह अपने जिलों का दौरा करना है तथा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ बैठकें कर जनसमस्याओं का समाधान करवाना है। यानि प्रभारियों मंत्रियों को सितम्बर माह में ही अपने अपने जिलों का दौरा करना है।
कांग्रेस ने इन दिनों जो राजनीतिक खींचतान चल रही है उसमें माना जा रहा है कि भरतपुर और टोंक जिलों में हंगामा होगा। रघु शर्मा और महेश जोशी को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थकों में नाराजगी है। रघु शर्मा को टोंक जिले का प्रभारी बनाया गया है। टोंक सचिन पायलट का निर्वाचन क्षेत्र हैं। यूं तो पायलट के समर्थक प्रदेशभर में फैले हुए हैं, लेकिन निर्वाचन क्षेत्र होने की वजह से टोंक में पायलट का खास प्रभाव है। रघु शर्मा के प्रति पायलट समर्थकों की नाराजगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गत 8 सितम्बर को अजमेर में अजय माकन के संवाद के दौरान कार्यकर्ताओं ने रघु शर्मा के बैनर फाड़ दिए।
माकन के सामने भी रघु शर्मा के घमंडपूर्ण रवैये की शिकायत की गई। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रघु शर्मा को धोखेबाज बताकर नारे लगाए अजमेर के हालातों को देखते हुए आशंका है कि रघु शर्मा जब प्रभारी मंत्री की हैसियत से टोंक जाएंगे तो हंगामा होगा। टोंक में भी रघु के रवैये को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। सूत्रों की माने तो उत्साहित कार्यकर्ता टोंक में रघु शर्मा के आने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि रघु शर्मा टोंक जिले की सीमा से लगे केकड़ी के विधायक हैं और केकड़ी में रघु शर्मा के समर्थक भी भरे पड़े हैं। हो सकता है कि रघु जब टोंक जाए तब केकड़ी के कार्यकर्ता भी मुकाबल करने के लिए पहुंच जाए। इसी प्रकार भरतपुर जिले में भी हंगामे की आशंका जताई जा रही है। सब जानते हैं कि विधानसभा में महेश जोशी की सलाह पर ही सचिन पायलट की सीट बदली गई थी।
जोशी ने ही पायलट और उनके समर्थक विधायकों को अयोग्य घोषित करने की शिकायत विधानसभा के अध्यक्ष के समक्ष की थी। जोशी की शिकायत पर ही विधायकों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हुए थे। जोशी की कार्यवाहियों से पायलट समर्थकों में भारी नाराजगी है। भले ही सचिन पायलट फिर से अशोक गहलोत के साथ खड़े हो गए हैं। लेकिन दोनों में अभी भी तनाव बना हुआ है। पायलट ने गुर्जर समुदाय को पांच प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर हाल ही में जो पत्र लिखा उससे प्रतीत होता है कि दोनों नेताओं के बीच खींचतान चल रही है। प्रदेश की राजनीति का माहौल 16 सितम्बर को उस समय गर्म हो गया, जब खान मंत्री प्रमोद जैन ने जयपुर में पायलट से मुलाकात की। सचिन पायलट की जुलाई-अगस्त की बगावत के बाद यह पहला अवसर था जब अशोक गहलोत मंत्रिमंडल के किसी वरिष्ठ सदस्य ने पायलट से मुलाकात की है। पायलट जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे, तब प्रमोद जैन सबसे निकट थे। लेकिन जुलाई अगस्त में हुई विधायकों की बाड़ेबाड़ी में प्रमोद जैन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाड़े में रहे।







