- आना सागर में आज भी गिर रहा है आठ नालों का मलमूत्र युक्त पानी।
- ऐलिवेटेड रोड बनाने वाली कंपनी को मुफ्त में दे दिया तोपदड़ा का खेलमैदान।
- सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मलिक की ओर से एडवोकेट पीयूष नाग ने विधिक नोटिस दिए।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – पुष्कर तीर्थ और सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को देखते हुए केन्द्र सरकार ने अजमेर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया था। इसके लिए करीब 2 हजार करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई। अजमेर के अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी बनाया जाना था। लेकिन चार वर्ष गुजर जाने के बाद भी स्मार्ट सिटी का स्वरूप सामने नहीं आया है।
जिस आनासागर के संरक्षण के नाम पर करोड़ रुपया खर्च कर दिया गया उस आना सागर में आज भी 8 नालों का मलमूत्र युक्त पानी गिर रहा है। योजना थी कि आना सागर के किनारे ट्रटीमेंट प्लांट बनाकर नालों का गंदा पानी प्लांट तक ले जाया जाएगा और फिर पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला जाएगा। करोड़ों रुपए की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट तो बना दिया गया, लेकिन प्लांट का क्षमता के अनुरूप उपयोग नहीं हो रहा है। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 17 एमएलटी पानी को शुद्ध करने की है लेकिन मात्र 7 एमएलटी पानी की शुद्ध किया जा रहा है। यह मशक्कत भी बेकार साबित हो रही है क्योंकि एक तरफ शुद्ध पानी डाला जा रहा है। तो दूसरी तरफ आठ नालों का मलमूत्र युक्त पानी गिर रहा है। ऐसे में सारी योजना धरी रह गई है। अजमेर में सीवरेज सिस्टम सफल नहीं होने की वजह से शहर का बुरा हाल है। स्मार्ट सिटी योजना इन्हीं खामियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मलिक की ओर से एडवोकेट पीयूष नाग ने संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों को विधिक नोटिस दिया है।
यह नोटिस भारत सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मिशन डायरेक्टर, राज्य सरकार के मुख्य सचिव, नगरीय विकास विभाग के सचिव अजमेर के संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, नगर निगम की आयुक्त, एडीए की आयुक्त आदि को दिया गया है। नोटिस में इन सभी अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है कि वे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नियमों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का उद्देश्य पीपीपी मॉडल को विकसित करना था, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक भी एक भी कार्य पीपीपी मॉडल के अनुरूप नहीं किया है। सरकारी धन को अपने निजी स्वार्थों की खातिर पानी की तरह खर्च किया जा रहा है। योजना के मुख्य उद्देश्य शहर में सफाई व्यवस्था को स्मार्ट करना, सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट,स्मार्ट मीटर लगा वाटर सप्लाई करना, शहर को पोल लेस करना, आईटी तकनीक को विकसित करना, ईगर्वेमेंट को बढ़ाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विस्तार करना, पर्यावरण को सुधारना आदि है। लेकिन अजमेर में अभी तक भी एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है।
इंडोर स्टेडियम और जेएलएन अस्पताल को पीपीपी मॉडल में रखकर सरकारी धन बचाया जा सकता था, लेकिन अधिकारी अब इन दोनों ही कामों पर करीब 100 करोड़ रुपया खर्च कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक स्मार्ट सिटी के लिए स्थाई सीईओ और कंपनी सचिव की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन अजमेर में सीईओ का काम कलेक्टर से चलाया जा रहा है और कंपनी सचिव को अनुबंध पर रखा गया है। शर्तों के अनुसार जो ठेकेदार अथवा एजेंसी निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं करती है, उस पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। लेकिन संबंधित अधिकारी दोषी ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने में झिझकते हैं। हालात इतने खराब हैं कि बिना डीपीआर के ही टेंडर आमंत्रित किए जा रहे हैं। नोटिस में बताया गया है कि ऐलिवेटेड रोड का काम शुरू करने से पहले ट्रैफिक सर्वें नहीं किया गया। ऐलिवेटेट रोड में तकनीकी ख़ामियाँ भी है। लेकिन संबंधित अधिकारी रोड बनाने वाली सिमफोनिया एंड ग्राफिक्स कंपनी पर मेहरबान है। इस कंपनी को ऐसे रोड बनाने का पहले का कोई अनुभव नहीं है। यही वजह है कि पिछले दो वर्ष से पूरा शहर जगह जगह से क्षतिग्रस्त है। पिलर बनाने का काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है। पानी के पाइप लाइन, बिजली की लाइन व सीवरेज की लाइन आदि के शिफ्ट किए बगैर ही ऐलिवेटेड रोड का काम शुरू कर दिया गया जिसका ख़ामियाज़ा अब शहर की छह लाख जनता भुगत रही है। रोड बनाने वाली कंपनी को सीमेंट प्लांट लगाने के लिए तोपदड़ा स्थित चार हजार मीटर का खेल मैदान नि:शुल्क दे दिया गया है। जबकि इस खेल मैदान का किराया सालाना 10 करोड़ रुपए आंका गया है। इतना ही नहीं तोपदड़ा क्षेत्र आबादी क्षेत्र हैं। एक ओर कंपनी को खेल मैदान नि:शुल्क दिया गया है, तो वहीं कंपनी को रोड निर्माण में लापरवाही बरतने की पूरी छूट है। कचहरी रोड पृथ्वीराज मार्ग और स्टेशन रोड पर जहां जहां निर्माण चल रहा है, वहां दिन भर धूल मिट्टी उड़ती है। शर्तों के मुताबिक कंपनी को पर्यावरण का ख्याल रखते हुए पानी का छिड़काव आदि उपाय करने हैं, लेकिन कंपनी की ओर से ऐसी किसी भी शर्त की पालना नहीं की जाती है। एडवोकेट पीयूष नाग ने जो नोटिस दिया है, उसमें लापरवाही के लिए पूरी तरह संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है। नोटिस के संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9414258469 पर अशोक मलिक से ली जा सकती है।







