मार्बल और ग्रेनाइट पत्थर पर 18 प्रतिशत जीएसटी होने के कारण नया निवेश नहीं हो रहा है।

  • भाजपा सांसद भागीरथ चौधरी ने कारोबारियों की मांग लोकसभा में पुरजोर तरीके से रखी।
  • 22 सितम्बर को रात दस बजे शून्य काल में बोलने का मौका मिला।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – अजमेर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद भागीरथ चौधरी ने 22 सितम्बर को रात 10 बजे लोकसभा में शून्य काल में देश के मार्बल और ग्रेनाइट पत्थर के कारोबारियों की समस्याओं को पूर जोर तरीके से रखा। हालांकि कोरोना काल में लोकसभा में प्रश्न काल नहीं हो रहा है, लेकिन आधा घंटे के शून्य काल में कुछ सांसदों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है।
लोकसभा में जब रात 10 बजे सांसद चौधरी को बोलने का मौका मिला तो चौधरी ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए कारोबारियों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा। चौधरी ने कहा कि वर्ष 2017 से जब से मार्बल और ग्रेनाइट के पत्थर पर जीएसटी 18 प्रतिशत की गई, तब से इस क्षेत्र में नया निवेश होना बंद हो गया है। जीएसटी व्यवस्था लागू होने से पहले मार्बल और ग्रेनाइट पर मात्र 5 प्रतिशत बिक्री कर लगता था। 18 प्रतिशत जीएसटी होने के बाद इस व्यवसाय का बुरा हाल है।
सांसद चौधरी ने लोकसभा में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को बताया कि मार्बल और ग्रेनाइट उत्पादन में राजस्थान देश का सबसे बड़ा केन्द्र है। प्रदेश के 33 में से 23 जिलों में इन दोनों पत्थरों का खनन और उत्पादन कार्य होता है। यही वजह है कि कृषि के बाद मार्बल कारोबार ही सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। करीब 50 लाख लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश में करीब तीन हजार गैंगसा (मार्बल व ग्रेनाइट पत्थर काटने वाली मशीन) लगी हुई है। चौधरी ने आग्रह किया कि दोनों पत्थरों पर पांच प्रतिशत जीएसटी का निर्धारण किया जाए, ताकि यह सूक्ष्म उद्योग पुनर्जीवित हो सके।
चौधरी ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि आगामी बजट घोषणा में इस मांग को शामिल किया जावे। चूंकि उनके संसदीय क्षेत्र अजमेर में ही देश की सबसे बड़ी किशनगढ़ मार्बल मंडी है, इसलिए कारोबारियों की पीड़ा मैं अच्छी तरह समझता हंू। चौधरी ने बताया कि किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी उनसे मुलाकात कर जीएसटी के मामले को संसद में उठाने की मांग की थी।

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