- सामरा के खजाने में 200 वर्ष पुराने सिक्के, बांट, ताले, घडिय़ां आदि हैं।
- सवा सौ वर्ष पहले काशी नरेश द्वारा कोटा महाराजा को लिखा पत्र भी।
- मेवाड़ राज घराने के पत्र व्यवहार।
- 18 भाषाओं में लिखे स्टाम्प पेपर।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – अजमेर की ज्ञान विहार आवासीय कॉलोनी में रहने वाले 62 वर्षीय बीएल सामरा पिछले 50 वर्षों से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संयोजए हुए हैं। बचपन की एक घटना का सामरा पर इतना असर हुआ कि उन्होंने किसी भी वस्तु को फिर कभी बेकार नहीं समझा। यही वजह है कि अब सामरा के खजाने में 200 से लेकर 300 वर्ष पुराने सिक्के, बांट, डाक टिकिट, ताले घडिय़ां आदि रखे हैं। इतना ही नहीं सवा सौ वर्ष पहले काशी नरेश ने जो पत्र कोटा महाराज को लिखा था, वह दुर्लभ पत्र भी सामरा के पास सुरक्षित रखा हुआ है।
सैकड़ों पांडुलिपियां स्टाम्प पेपर, पोस्ट कार्ड आदि सामग्री को भी सुरक्षित रखा गया है। 18 भाषाओं में लिखे स्टाम्प पेपर तो ऐतिहासिक धरोहर बन गए हैं। मेवाड़ राज घराने के अनेक पत्र सुरक्षित रखे गए हैं। 25 फिट लम्बी जन्म कुंडलियां देखने से ही पता चलता है कि सामरा को कितनी रुचि है। कलम, दवात, लेखन सामग्री, लैम्प स्टेंड, इत्र की खूबसूरत बोतलें, इत्र दान, फूल दान ऐसी अनेक वस्तुए हैं जो सामरा के खजाने को बेशकीमती बनाती है। ऐतिहासिक वस्तुओं को संरक्षित करने में सामरा अभी भी सक्रिय हैं।
भारतीय जीवन बीमा निगम से प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए सामरा आज भी अपनी धुन के पक्के इंसान हैं। जब कभी उन्हें पुरानी वस्तुओं के बारे में जानकारी होती है तो उसे खरीदने व लेने के लिए पहुंच जाते हैं। सामरा ने कई अवसर पर अपने इस खजाने की प्रदर्शनी भी लगाई है। मोबाइल नम्बर 9414194108 पर बीएल सामरा से संवाद किया जा सकता है।







