जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगमों के चुनाव 31 अक्टूबर तक ही कराने होंगे।

  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका और निर्वाचन विभाग के तर्क खारिज किए।
  • अब 129 निगम, परिषद और पालिकाओं के चुनाव करवाने का दबाव बढ़ा। इन संस्थाओं का कार्यकाल 20 अगस्त को ही पूरा हो चुका है।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 19 सितम्बर को राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश चंद की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें प्रदेश के 6 नगर निगम के चुनाव 31 मार्च 2021 तक कराने की मांग की गई थी। दोनों न्यायाधीशों ने कहा कि जयपुर, जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगम के चुनाव नवम्बर 2019 से ही लम्बित चले आ रहे हैं।
सरकार की कोरोना संक्रमण की लाचारी को देखते हुए दो बार पहले ही समय बढ़ाया जा चुका है। अब हाईकोर्ट ने पूर्व में 31 अक्टूबर तक चुनाव करवाने का जो आदेश दे रखा है उस पर अमल किया जाना जरूरी है। कोर्ट न सरकार की किसी भी लाचारी को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट का कहना रहा कि जब कोरोना काल में सरपंचों के चुनाव हो सकते हैं तो फिर वार्ड पार्षद के क्यों नहीं? जो समस्या सरपंच चुनाव में है वहीं पार्षद चुनाव में होगी। सुनवाई के दौरान निर्वाचन विभाग ने भी तैयारियों के लिए समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने इंकार कर दिया। यानि अब प्रदेश के राजधानी जयपुर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह शहर जोधपुर और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के गृह नगर कोटा में दो दो नगर निगमों में 31 अक्टूबर से पहले चुनाव होंगे।
129 निकायों में चुनाव करवाने का दबाव बढ़ा:
अब प्रदेश की 129 स्थानीय निकाय संस्थाओं में चुनाव करवाने का दबाव बढ़ गया है। अजमेर सहित नगर निगम, नगर परिषद तथा नगर पालिकाओं का कार्यकाल गत 20 अगस्त को ही पूरा हो चुका है। कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव नहीं होने की वजह से सरकार ने प्रदेश की इन 129 निकायों में सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति मेयर, सभापति और अध्यक्ष के पद पर कर दी है। यानि इन लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कांग्रेस सरकार का नियंत्रण हो गया है। सवाल उठता है कि जब 6 निकायों में कोरोना काल में चुनाव हो सकते हैं, तब शेष निकायों में क्यों नहीं?
यदि सरकार 6 निगमों के साथ ही 129 निकायों में चुनाव करवाती है तो मतदाताओं को भी सहूलियत होगी। उल्लेखनीय है कि कोरोना का बहाना कर जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के चुनाव भी लगातार टाले जा रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश में जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव भी नहीं हुए हैं।

 

 

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