कृषि सुधार कानून के विरोध पर कांग्रेस का दोहरा रवैया। पंजाब में आंदोलन पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ शांत।

महाराष्ट्र में भी नहीं हो रहा कोई आंदोलन।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कृषि सुधार कानून के विरोध को लेकर भी कांग्रेस का दोहरा रवैया सामने आ रहा है। कांग्रेस शासित पंजाब में तो मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह खुद आंदोलन कर रहे हैं, इसलिए अनेक किसान भी सड़कों पर हैं, लेकिन कांग्रेस शासित राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसान सड़कों पर नहीं है। कहा जा सकता है कि राजस्थान में कोरोना संक्रमण की वजह से धारा 144 लगी हुई है। इसलिए किसान आंदोलन नहीं हो सकता, लेकिन धारा 144 की धज्जियाँ डूंगरपुर क्षेत्र में उड़ चुकी है।
जब पंजाब में सरकार के सहयोग से किसान आंदोलन हो सकता है तब राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं? क्या कृषि सुधार कानून से सिर्फ पंजाब के किसानों को ही नुकसान होगा? कोरोना संक्रमण के जो हाल राजस्थान में है वो ही हाल पंजाब में भी हैं। इसलिए आंदोलन को लेकर कोरोनो का बहाना नहीं लिया जा सकता है। हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 28 सितम्बर को राज्यपाल को ज्ञापन देकर कृषि सुधार कानून को वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा सरकार की ओर से इस कानून का कोई विरोध नहीं हुआ है।
पंजाब में आंदोलन को किस हद तक सरकार का समर्थन है, इसका अंदाजा 28 सितम्बर को दिल्ली में इंडिया गेट के निकट एक पुराने ट्रेक्टर को जलाए जाने की घटना से लगाया जा सकता है। यह ट्रेक्टर युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने जलाया। टे्रक्टर को एक ट्रक में रख कर इंडिया गेट तक इसलिए ले आया गया कि पंजाब पुलिस का संरक्षण था। ट्रक में पंजाब पुलिस के जवान सवार थे। यदि पंजाब पुलिस की भूमिका नहीं होती तो ट्रक और ट्रेक्टर इंडिया गेट के पास नहीं पहुंच सकता था। ट्रेक्टर को जलाते वक्त युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने शहीदे आजम भगत सिंह जिंदा बाद के नारे भी लगाए।
ट्रेक्टर जलाते वक्त भगत सिंह का नारा लिया जाना भी पूरी तरह गलत था। कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किसान आंदोलन सिर्फ पंजाब में ही क्यों हो रहा है? पंजाब के सीएम अमरेन्द्र सिंह ने 28 सितम्बर को जो बयान दिया वह तो पूरी तरह राष्ट्र विरोधी है। अमरेन्द्र ने कहा कि यदि कानून का वापस नहीं लिया गया तो पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब के युवाओं के हाथ में बंदूक थमा देगी।
आईएसआई पंजाब में कैसे घुसपैठ करेगी, यह तो अमरेन्द्र सिंह ही बता सकते हैं, लेकिन अमरेन्द्र सिंह को यह समझना चाहिए कि पंजाब पहले ही आतंकवाद के दौर से गुजर चुका है। पंजाब के आंतकवाद की वजह ही पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। क्या अमरेन्द्र सिंह ने इंदिरा गांधी की शहादत से भी कोई सबक नहीं लिया है? अब जब कांग्रेस शासित राज्यों में केन्द्र के कृषि सुधार कानून को नकारने की वैधानिक कार्यवाही हो रही है तो आंदोलन क्यों किया जा रहा है। कांग्रेस के नेता जयराम ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पास कर केन्द्र के कानून को नकारा जा सकता है।

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