अब भारत में भगवान राम जैसी मर्यादा दिखाने की जरुरत है।

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  • अयोध्या में विवादित ढाँचा राम भक्तों ने नहीं, अराजकतत्वों ने गिराया-न्यायाधीश एसके यादव।
  • हाईकोर्ट में अपील करेंगे-गिलानी।
  • इकबाल अंसारी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भगवान राम ने जब राक्षसी प्रवृत्ति के रावण को मार कर लंका पर विजय हासिल की, तब कोई खुशी का इजहार नहीं किया था। तब यही कहा गया कि यह असत्य पर सत्य की विजय है। भगवान राम का पूरा जीवन मर्यादा में रहा। उन्होंने कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। छोटे भाई लक्ष्मण ने जब कभी गुस्सा दिखाने की कोशिश की तो राम ने ही रोका। राम हमेशा संयमित रहे। देश को अब भगवान राम जैसी मर्यादा दिखाने की जरुरत है।
30 सितम्बर को लखनऊ स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश एसके यादव ने उन सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया, जिन पर 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं जुटाया, जिससे यह पता चलता हो कि आरोपियों ने विवादित ढांचे को गिराया है। किसी सुनियोजित षडयंत्र को साबित करने में भी सीबीआई विफल रही है।
ऐसा लगता है कि कुछ अराजक तत्वों ने ढांचे को गिराया है। अपने दो हजार पृष्ठों के फैसले में न्यायाधीश यादव ने अख़बारों में छपी खबरों और न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित वीडियो को प्रमाणिक नहीं माना। स्पेशल कोर्ट के इस फैसले से अब विवादित ढांचे को लेकर कोई मामला अदालत में लंबित नहीं रहा है। इस मामले में 49 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 17 नामजद आरोपियों की मृत्यु हो गई। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, चंपतराय, साध्वी ऋतुंभरा, रामनाथ वेदांती, नृत्यगोपाल दास, विनय कटीयार, आचार्य धर्मेन्द्र, साक्षी महाराज, महंत धर्मदास, जयभगवान आदि सभी 32 आरोपी या तो अदालत में उपस्थित रहे या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर्ट से जुड़े रहे। फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आडवाणी ने कहा कि लम्बे समय बाद खुशी की कोई खबर मिली है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों जो फैसला दिया था, वह विवादित भूमि को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही अयोध्या में राममंदिर निर्माण का काम शुरू हो सका है। अब लखनऊ की स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद सभी आरोपी बाइज्जत बरी हो गए हैं। फैसले पर बाबरी मस्जिद के पक्ष कार जफरयाव जिलानी ने कहा है कि अब हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। जिलानी ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में उन नेताओं के बयान शामिल नहीं किए जो स्वयं ढांचे को तोडऩे का दावा कर रहे हैं। उन्होंने ने कहा कि फैसले में अनेक खामिया है,जिन्हें हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। लेकिन वहीं दूसरे पक्ष कार इक़बाल अंसारी ने सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन रहा है, तब कोई विवाद नहीं होना चाहिए। अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर सराहनीय फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश में सदभावना का माहौल बना रहना चाहिए।

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