जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 29 जून को राजस्थान भर में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान की परीक्षा ली। कोरोना वायरस के संक्रमण की दहशत के बीच प्रदेश के 11 लाख से भी ज्यादा विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। 30 जून को भी इतने ही विद्यार्थी गणित विषय की परीक्षा देंगे। बोर्ड 12वीं कक्षा के बकाया विषयों की परीक्षा 28 जून तक पहले ही ले चुका है। राजस्थान बोर्ड की इन परीक्षाओं को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन 28 जून को कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और परीक्षा पर रोक नहीं लगाई। सुप्रीम कोर्ट का कहना रहा कि शैक्षणिक संस्थाओं में कोर्ट का न्यूनतम दखल होना चाहिए। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि राजस्थान में कोरोना की ताजा स्थिति कैसी है तथा 450 से भी ज्यादा परीक्षा केन्द्र वाले स्कूलों को कोरोना काल में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया। जब सामूहिक आयोजनों पर रोक लगी हुई है तब 11 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा क्यों ली जा रही है? लेकिन ऐसे सभी तर्कों को कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोरोना काल में बोर्ड की परीक्षाओं के आयोजन को लेकर विधि विशेषज्ञ समीक्षा करते रहेंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ही पिछले सप्ताह सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बकाया सभी परीक्षाओं पर रोक लगा दी थी। अब देश भर में सीबीएसई की बकाया परीक्षा नहीं होंगी। कोर्ट का कहना रहा कि 12वीं का परिणाम घोषित कर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश भी दिलवाया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई की ओर से भी परीक्षा करवाने में असमर्थता जताई गई थी। तब कोर्ट ने सीबीएसई के पक्ष से सहमति जताई। कोरोनाकाल में परीक्षा नहीं करवाने के सीबीएसई के सुझावों पर मुहर लगाते हुए कोर्ट ने अपने सुझाव भी दिए, ताकि परीक्षा नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थियों की योग्यता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़े।
मनीष सिंघवी ने रखा बोर्ड का पक्ष:
राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के पुत्र मनीष सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार और शिक्षा बोर्ड का पक्ष रखा। सिंघवी ने कहा कि शिक्षा बोर्ड गत 16 जून से ही परीक्षा ले रहा है। परीक्षा अब अंतिम चरण में है। कोरोनाकाल में जिन परीक्षा केन्द्र वाले स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया, उन सभी को सैनेटाइज्ड करवा लिया गया है। बोर्ड ने 10वीं की दोनों बकाया परीक्षाओं को भी करवाने की पूरी तैयारी कर ली है।
बोर्ड पूर्व में नहीं था परीक्षा करवाने के पक्ष में:
28 जून को वकील मनीष सिंघवी ने भले ही बोर्ड का पक्ष मजबूती के साथ रखा हो, लेकिन पूर्व में जब राज्य सरकार ने परीक्षा को लेकर शिक्षा बोर्ड से राय ली थी, तब बोर्ड प्रशासन ने परीक्षा करवाने के पक्ष में नहीं था। बोर्ड की राय को दरकिनार कर राज्य सरकार ने परीक्षा करवाने का निर्णय लिया था।
समान नीति नहीं होने से विद्यार्थी परेशान:
कोरोरा काल में परीक्षा की समान नीति नहीं होने से विद्यार्थी परेशान हैं। देशभर में जहां सीबीएसई की बकाया परीक्षा नहीं हो रही है, वहीं राज्य सरकारें अपने बोर्ड की परीक्षाओं पर अपने नजरिए से निर्णय ले रही हैं। इससे मेहनती विद्यार्थियों को भी परेशानी हैं। सीबीएसई के विद्यार्थी राजस्थान बोर्ड के विद्यार्थियों के मुकाबले पिछड़ सकते हैं। क्योंकि सीबीएसई के विद्यार्थियों को सम्पन्न हुई विषयों की परीक्षा के प्राप्तांकों के औसत के हिसाब से बकाया विषयों में अंक मिलेंगे। जबकि राजस्थान बोर्ड के विद्यार्थियों को परीक्षा के अनुरूप नम्बर मिलेंगे। इससे सीबीएसई के उन विद्यार्थियों को नुकसान होगा जिनकी पूर्व की परीक्षा में कमजोर हुई है। ऐसे विद्यार्थियों को कमजोार परीक्षा के अनुरूप ही बकाया विषयों में नम्बर मिलेंगे।







