जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 29 जून को पाकिस्तान स्थित कराची स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग पर ग्रेनेड से हमला किया गया। बताया जा रहा है कि हमला करने वाले चारों आतंकी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी से जुड़े हुए हैं और यह आर्मी बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करवाना चाहती है। आर्मी के लड़ाकों का मकसद चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक गलियारे को भी नष्ट करना है। आरोप है कि पाकिस्तान की फौज बलूचिस्तान के नागरिकों पर जुल्म करती है। 29 जून को सुनियोजित तरीके से कराची के स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग में घुस जाने में सफल हो जाते तो पाकिस्तान को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती। आतंकी ग्रेनेड फेंककर बिल्डिंग में घुसते, इससे पहले ही सुरक्षाकर्मियों ने चारों आतंकियों को ढेर कर दिया। इस हमले में दो नागरिकों के मारे जाने की भी खबर हैं।
कश्मीर में आतंक को हवा:
जो पाकिस्तान अब तक हमारे कश्मीर में आतंकवाद को हवा देता रहा, उसे अब आतंक का दर्द का अहसास होगा। पाकिस्तान में आतंकियों को संरक्षण देने का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 25 जून को ही प्रधानमंत्री इमरान खान ने आतंकी ओसामा बिल लादेन को शहीद बताया। इमरान ने कहा कि अमरीकनों ने हमारे देश में घुस कर लादेन जी को शहीद कर दिया। जबकि दुनिया जानती है कि अमरीका में आतंकी हमला करवाने में लादेन का ही हाथ था। इसलिए अमरीका की नजर में लादेन मोस्ट वॉन्टेड था। अमरीका ने पाकिस्तान के एट्टाबाद में सैन्य कार्यवाही कर लादेन को मार डाला। पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी आतंकी ही हमारे कश्मीर में आतंंकवाद को हवा देते हैं। पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए आतंकी ही कश्मीर में आतंकी वारदातें करते हैं। लेकिन अब जब पाकिस्तान में आतंकी हमला हुआ है, तब इमरान खान को पता चलेगा कि आतंक का दर्द कैसा होता है। आतंक पाकिस्तान में हो या भारत में। दोनों ही स्थानों पर बुरा है। यदि इमरान खान अपने देश में आतंक को संरक्षण नहीं दे तो यह दोनों मुल्कों के लिए बेहतर होगा। कुछ लोग कुछ भी कहें, लेकिन पूरी दुनिया में भारत में मुसलमान सुकून और तरक्की के साथ रह रहा है। मुस्लिम राष्ट्रों से भी ज्यादा सुविधाएं भारत में मुसलमानों को मिली हुई है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद आम कश्मीरी को भी अपने अधिकार मिले हैं। अच्छा हो कि पाकिस्तान आतंक का रास्ता छोड़कर एक जिम्मेदार मुल्क की भूमिका निभाए। इन दिनों पाकिस्तान चीन के बहकावे में आकर भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। जबकि चीन अपने ही देश में मुसलमानों पर जुल्म ढाह रहा है। इमरान खान को चीन के जिंगलियान प्रांत में मुसलमानों पर होने वाले जुल्म नजर नहीं आते हैं।
हुर्रियत में फूट,
29 जून को ही कश्मीर में अलगाववादियों की संस्था हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में भी फूट हो गई। कॉन्फ्रेंस में शामिल सैय्यद अलीशाह गिलानी ने इस्तीफा दे दिया। प्रेस नोट और अपने ऑडियो संदेश में गिलानी ने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जब हुर्रियत को एकजुटता दिखाने की जरुरत थी, तब अनेक नेता निष्क्रिय हो गए। अब जब ऐसे नेताओं की कुर्सी खिसकने लगी है तब सक्रियता दिखाई जा रही है। ऐसे में अब हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में रहने का कोई मकसद नहीं है। गिलानी ने हुर्रियत में शामिल अन्य दलों व नेताओं को भी कहा कि वे अब स्वतंत्र हैं। जिस मकसद से हुर्रियत का गठन किया गया था, उस मकसद में वह सफल नहीं रही है। हालांकि गिलानी ने अपने बयान में हुर्रियत के किसी भी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन मीर वाइज जैसे नेताओं की ओर इशारा किया। मालूम हो कि हुर्रियत के कई नेताओं पर पाकिस्तान और अन्य देशों से फंड लेने के आरोप लगे हैं। ऐसे कई नेता इन दिनों जेल में भी हैं। हुर्रियत में फूट से भी पाकिस्तान को झटका लगा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कश्मीर को ओर स्वायत्त देने तथा आजादी दिलाने के लिए विभिन्न संगठनों ने मिलकर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन किया था।







