तेल वृद्धि के विरोध में कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन।

जयपुर में प्रदेश अध्यक्ष पायलट और अजमेर में शहर अध्यक्ष जैन के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – पेट्रोल डीजल की मूल्य वृद्धि के विरोध में 29 जून को कांग्रेस ने मोदी सरकार के विरुद्ध देशभर में धरना प्रदर्शन किया। इसके अंतर्गत राजस्थान के जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और अजमेर में शहर अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। अजमेर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस के नेताओं ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर यूपीए और एनडीए सरकार के बीच तुलना की। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि वर्ष 2014 में जब डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी, तब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 130 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन तब भी केन्द्र सरकार द्वारा एक लीटर तेल पर मात्र साढ़े तीन रुपए एक्साइज ड्यूटी ली जा रही थी। यानि तब की सरकार महंगा तेल खरीद कर उपभोक्ताओं को सस्ता उपलब्ध करवा रही थी। लेकिन अब जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक बैरल तेल मात्र 30 डॉलर में बिक रहा है, तब केन्द्र सरकार 35 रुपए तक एक्साइज ड्यूटी वसूली रही है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केन्द्र सरकार को यह बताना चाहिए कि जब कच्चा तेल सस्ता है, तब उपभोक्ताओं को 86 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल क्यों बेचा जा रहा है? कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया डीजल महंगा होने से परिवहन भी महंगा हो गया है। तेल के दाम लगातार बढऩे से आम आदमी परेशान है। अजमेर में कलेक्ट्रेट पर किए गए प्रदर्शन में शहर अध्यक्ष विजय जैन के साथ साथ विधायक राकेश पारीक, पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, प्रदेश सचिव महेन्द्र सिंह रलावता, देहात अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह राठौड़, श्रीमती नसीम अख्तर आदि उपस्थित रहे।
अदालतों के लिए सैनेटाइज मशीने:
अजमेर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने के लिए दस सैनेटाइजर मशीनें उपलब्ध करवाई गई है। जिला लोक अभियोजक विवेक पाराशर ने बताया कि झूूंझुनूं की सामाजिक संस्था श्री श्याम आशीर्वाद सेवा व राजस्थानी क्राफ्ट फाउंडेशन ने अजमेर विधिक सेवा प्राधिकरण को 14 सैनेटाइजर मशीनें उपलब्ध करवाई है। 29 जून को एक समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनूप कुमार सक्सेना ने 10 सैनेटाइजर मशीनें न्यायालय परिसर को दी। इसी प्रकार दो मशीन पुलिस अधीक्षक और दो मशीन कलेक्ट्रेट कार्यालय को दी गई है। पाराशर ने बताया कि 29 जून से अदालतों में कामकाज शुरू हो गया है। अब वकील भी न्यायालय परिसर में आने लगे हैं। डीजे सक्सेना ने उम्मीद जताई कि अदालत परिसर में आने वाले वकील अदालतों में प्रवेश से पहले इन मशीनों से अपने हाथों को सैनेटाइज करेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से स्वयं को ही बचना होगा।
अफसर ने ली अदालत की शरण:
अजमेर के कोटड़ा क्षेत्र में संचालित भारत सरकार के बेतार अनुश्रवण केन्द्र के प्रभारी विनय मीणा ने सरकारी बंगले की मरम्मत करवाने के लिए अदालत की शरण ली है। एडवोकेट अरविंद मीणा की ओर से दायर इस्तगासे में आरोप लगाया गया है कि 24 जून को बंगले की छत का प्लास्टर गिर गया। केन्द्र परिसर में ही स्थापित बंगले की मरम्मत के लिए कई बार सीपीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को लिखा गया। लेकिन अजमेर स्थित कार्यपालक अभियंता उत्पल त्रिपाठी और जोधपुर स्थित अभियंता विक्रांत वर्मा ने बंगले की मरम्मत नहीं करवाई। इस्तगासे में कहा गया कि दोनों अभियंताओं का कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 166, 308 में दंडनीय अपराध है। इसलिए इस्तागासे को जांच के लिए क्रिश्चियनगंज पुलिस थाने पर भेजा जाए। न्यायिक मजिस्टे्रट संख्या तीन अनूप कुमार ने इस मामले में 30 जून को सुनवाई निधारित की है। यहां उल्लेखनीय है कि केन्द्र प्रभारी विनय मीणा आईईएस सेवा के अधिकारी है।

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