कोरोना काल में अस्पतालों का निरीक्षण करने वाले डीसी और कलेक्टर जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा से प्रेरणा लें।

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  • आकस्मिक निरीक्षण में सरकारी अस्पताल के प्रबंधन की पोल खुली।
  • आखिर किस बात की तनख्वाह ले रहे हैं चिकित्सा कर्मी।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर प्रदेश के संभागीय आयुक्त और कलेक्टर भी समय समय पर सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करते हैं। डीसी और कलेक्टर के निरीक्षण के पीछे मुख्यमंत्री की यही मंशा है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त सुविधा मिले। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश भर में डीसी और कलेक्टर निरीक्षण भी कर रहे हैं। लेकिन ऐसे डीसी और कलेक्टर को जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा से प्रेरणा लेनी चाहिए।

 

असल में अधिकांश डीसी और कलेक्टर निरीक्षण से पहले अस्पताल प्रबंधन को सूचना दे देते हैं। यही वजह है कि बड़े अधिकारियों के सामने अस्पताल की अव्यवस्था और मरीजों की समस्याएं सामने नहीं आ पाती है। लेकिन 4 अक्टूबर रविवार को जोधुपर के डीसी डॉ. शर्मा ने जब जोधपुर के एक सरकारी अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण किया तो अस्पताल प्रबंधन की पोल खुल गई। चूंकि डॉ. शर्मा पूर्व सूचना दिए बिना ही अस्पताल पहुंचे थे, इसलिए अस्पताल की हकीकत सामने आ गई। डॉ. शर्मा ने प्रात: 9 बजकर 40 मिनट पर जब उपस्थिति रजिस्टर चेक किया तो कई वरिष्ठ चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी अनुपस्थित पाए गए। डॉ. शर्मा ने कहा कि रविवार के दिन तो चिकित्सा कर्मी मुश्किल से दो तीन घंटे ड्यूटी देनी होती है।

 

यदि अवकाश के दिन भी थोड़े समय के लिए ड्यूटी नहीं दी जा रही है तो फिर चिकित्सा कर्मी किस बात की तनख्वाह ले रहे हैं? कुछ चिकित्सा कर्मियों ने अनुपस्थित रहने वाले कर्मियों का बचाव करने की कोशिश की तो डॉ. शर्मा ने साफ कहा कि मेरे सामने झूठ नहीं चलेगा। डॉ. शर्मा ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि चिकित्सा कर्मियों ने स्वयं ही मास्क नहीं लगा रखा है तथा यूनीफ़ॉर्म में भी नहीं है। निरीक्षण के बाद डॉ. शर्मा ने अस्पताल प्रबंधन को हिदायत दी कि वह सरकार की नीतियों के अनुरूप मरीजों को राहत प्रदान करें। उन्होंने कहा कि जो चिकित्सा कर्मी अनुपस्थित पाया गया है, उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

 

डॉ. शर्मा ने अपने आकस्मिक निरीक्षण से यह दर्शा दिया है कि वे अपने काम के प्रति वफादार हैं और चहेते हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ कोरोना काल में मरीजों को अधिक से अधिक मिले। असल में हकीकत तभी सामने आ सकती है, जब सरकारी अस्पतालों का आकस्मिक निरीक्षण किया जाए। जो संभागीय आयुक्त और कलेक्टर अस्पताल प्रबंधन को सूचना देकर निरीक्षण करते हैं, उनके निरीक्षण से कोई फायदा नहीं होता है। क्योंकि अस्पताल प्रबंधन वो ही दिखाता है जो अच्छा है। अस्पताल की हकीकत सामने नहीं लाई जाती।

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