जयपूर (एस.पी.मित्तल) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 जून को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि कोरोना वायरस से उपजे हालातों के मद्देनजर देश के 80 करोड़ गरीब लोगों को नवम्बर 2020 तक मुफ्त राशन मिलता रहेगा।
यानि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में पात्र परिवार को एक किलो चना तथा प्रत्येक सदस्य को पांच किलो गेहंू मुफ्त मिलेगा। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहारी जैसे राज्यों में गेहंू की जगह चावल उपलब्ध होगा। नवम्बर तक दी जाने वाली इस मदद पर करीब 90 हजार करोड़ रुपया खर्च होगा। हालांकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोरोना काल में गरीबों को नकद राशि देने की मांग की थी, लेकिन मोदी ने नकद राशि देने के बजाए गरीब के घर में दो वक्त की रोटी का प्रबंध कर दिया।
अब जब देश के 125 करोड़ लोगों में से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन सामग्री मिलेगी, तब पेट्रोल-डीजल के दाम कम कैसे होंगे? गरीबों की मदद के लिए किसी को तो कीमत चुकानी पड़ेगी ही। मोदी ने 30 जून के अपने संबोधन में संकेत दे दिए हैं कि पेट्रोल डीजल पर से एक्साइज ड्यूटी कम नहीं होगी।
यहां यह उल्लेखनीय है कि एक लीटर पेट्रोल डीजल पर केन्द्र सरकार 35 रुपए तक ड्यूटी वसूलती है। टैक्स वसूलने के इस कार्य में राज्य सरकारें भी पीछे नहीं हैं। राज्य सरकारें एक लीटर तेल पर 20 रुपए तक शुल्क वसूल रही है। यही वजह है कि 14 रुपए लीटर वाला तेल उपभोक्ताओं को 86 रुपए प्रति लीटर तक मिल रहा है। प्रधानमंत्री किसान निधि योजना में देश के पात्र किसानों को सालाना 6 हजार रुपए की नकद भी दी जा रही है।
ऐसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं हैं जिनमें अरबों रुपया खर्च होता है। अकेले राजस्थान में नरेगा में 55 लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। एक श्रमिक को प्रतिदिन करीब 200 रुपए का मेहनताना दिया जाता है। जब अकेले राजस्थान में 55 लाख नरेगा श्रमिक हैं, तब देशभर के नरेगा श्रमिकों और उनको दिए जाने वाले मेहनताने का अंदाजा लगाया जा सकता है। नरेगा श्रमिकों को भी केन्द्र सरकार द्वारा ही मेहनताना दिया जाता है।







