राज माता विजया राजे सिंधिया की स्मृति में 100 रुपए का सिक्का तब जारी हुआ है|

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  • जब मध्यप्रदेश के 27 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं।
  • इन चुनावों में राज माता के पौते ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा ही दांव पर लगी हुई है।
  • राज माता ने मथुरा में भगवान कृष्ण से जो मांगा था वो आज पूरा हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज माता की पुत्री राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का नाम लिए बगैर समझाया कि विजया राजे पार्टी के लिए कितनी समर्पित थीं, लेकिन कभी भी पद का लालच नहीं किया।

 

 

 

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भाजपा की संस्थापक सदस्य रहीं ग्वालियर राज घराने की राज माता स्वर्गीय विजया राधे सिंधिया की स्मृति में 12 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इस सिक्के पर एक तरफ विजया राजे का फोटो भी है। हालांकि यह सिक्का राज माता के जन्म शताब्दी वर्ष के समापन पर जारी हुआ है, लेकिन इस सिक्के के जारी होने पर मध्यप्रदेश में राजनीतिक मायने भी हैं। एमपी के 27 विधानसभा क्षेत्रों में इन दिनों उपचुनाव का शोर है। 3 नवम्बर को मतदान होना है। सब जानते हैं कि राजमाता के पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 25 कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था, इससे एमपी में कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई।

 

 

 

अब शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का भविष्य इन्हीं उपचुनावों के परिणाम पर टीका है। हालांकि भाजपा ने ज्योतिरादित्य के समर्थक सभी 25 कांग्रेसी विधायकों को भाजपा का उम्मीद बना दिया है, लेकिन राजमाता के पौते को सफलता नहीं मिली तो भाजपा की सरकार भी धराशायी हो जाएगी। ऐसे में राजमाता पर जारी 100 रुपए के सिक्के का महत्व समझा जा सकता है। उपचुनाव राजमाता के प्रभाव वाले ग्वालियर क्षेत्र में ही हो रहे हैं। ग्वालियर राजघराने के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले राजमाता के पुत्र माधवराव और फिर पौत्र ज्योतिरादित्य इसी क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रहे। ज्योतिरादित्य ने अपने समर्थक विधायकों का इसलिए तो इस्तीफा करवाया कि उपचुनाव फिर से जीत हासिल कर ली जाएगी। राजमाता पर सिक्का जारी होने से ज्योतिरादित्य की स्थिति और मजबूत होगी।

 

 

 

वसुंधरा को इशारा:
वर्चुअल तकनीक से हुए समारोह में राजस्थान की पूर्व सीएम और राजमाता की पुत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुई। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने वसुंधरा राजे का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बताया कि राज माता पार्टी के लिए कितनी समर्पित थी। लेकिन उन्होंने कभी भी पद की लालसा नहीं की। राज माता के जनसंघ के अध्यक्ष का प्रस्ताव भी विनम्रता के साथ अस्वीकार कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते भी राज माता ने कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं किया। त्याग की भावना की वजह से ही राज माता का कद पार्टी में बहुत ऊंचा था। मालूम हो कि वसुंधरा राजे इन दिनों भाजपा में अपनी भूमिका को लेकर असंतुष्ट चल रही हैं। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व चाहता है कि राजे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हों, लेकिन राजे की रुचि राजस्थान में ही है। अमितशाह के बाद जेपी नड्डा ने भी राजे को अपनी कार्यकारिणी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है, लेकिन फिर राजे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय नहीं हो रही हैं। वसुंधरा राजे के असंतोष के मद्देनजर प्रधानमंत्री का भाषण बहुत मायने रखता है। गत विधानसभा चुनाव में भी वसुंधरा राजे के प्रति लोगों की नाराजगी ने भाजपा को ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

 

 

 

राज माता का सपना पूरा हो रहा है:
विजयाराजे सिंधिया को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक बार जब पार्टी के काम से राजमाता मथुरा गईं, तब उन्होंने भगवान कृष्ण से आग्रह किया कि आप एक बार ऐसी बांसुरी बजाएं, जिसमें देशवासी जागृत हो सके। राजमाता की यह प्रार्थना अब पूरी हो रही है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है तथा अयोध्या में जन्म स्थल पर ही भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है। इतना ही नहीं महिलाओं में समानता लाने के लिए तीन तलाक के विरुद्ध कानून भी बनाया गया है।

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