- सवाल यह भी है कि फारूख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं का अब कितना प्रभाव रह गया है?
- अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर के हालात बदल चुके हैं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से प्रभावी करने के लिए 15 अक्टूबर को श्रीनगर में पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला के निवास पर एक बैठक हुई। इस बैठक में पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती भी शामिल हुईं। महबूबा 13 अक्टूबर को ही जेल से बाहर आईं हैं। इस बैठक में छोटे बड़े 11 दलों के नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया। ये सब वो ही नेता हैं जो जिन्होंने कश्मीर को लूटा तथा आतंकवाद को बढ़ावा दिया।
सरकारी योजनाओं खास कर केन्द्र सरकार द्वारा दी गई राशि को इन नेताओं ने कैसे खुर्दबुर्द किया, यह कश्मीर की जनता अच्छी तरह जानती है। इन नेताओं के संरक्षण की वजह से ही पाकिस्तान परस्त कुछ युवा भारतीय सेना पर पत्थर फेंकते रहे। चूंकि अनुच्छेद 370 में जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार मिले हुए थे, इसलिए सेना की कार्यवाही भी प्रभावी नहीं हो पा रही थी। लेकिन गत वर्ष अगस्त में ऐसे नेताओं को जेल में डालने और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद कश्मीर के हालात तेजी से सामान्य हुए हैं।
फारुख अब्दुल्ला और महबूबा जैसे नेता भले ही कश्मीर के हालात खराब बताएं, लेकिन हकीकत यह है कि अब राज्य और केन्द्र की योजनाओं का पूरा लाभ कश्मीरियों को मिल रहा है। जब पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ सरकारी नौकरियां भी कश्मीरियों को मिल रही है। इतना ही नहीं अब कश्मीरी युवा हमारे सुरक्षा बलों पर पत्थर भी नहीं फेंकते हैं। जब कभी ऐसी घटना होती है, तब सुरक्षा बल सख्ती से निपटते हैं। अब जम्मू कश्मीर सरकार का नियंत्रण भी प्रभावी हो रहा है। पाकिस्तान परस्त आतंकियों के खिलाफ राज्य पुलिस और सुरक्षा बल मिल कर कार्यवाही कर रहे हैं।
कश्मीर का विकास भी तेजी से होने लगा है। कश्मीर के सुधरते हालातों में सवाल उठता है कि फारुख-महबूबा जैसे नेताओं का अब कितना प्रभाव रह गया है? क्या ऐसे नेताओं पर कश्मीरियों का भरोसा बचा है? सरकार को ऐसे नेताओं के दबाव में कोई राजनीतिक प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं करनी चाहिए। कश्मीर के लोग अब इन नेताओं की हकीकत को समझ चुके हैं। ऐसे नेता अपने बच्चों को तो विदेशों में रखते हैं और कश्मीरी युवाओं को भड़काते हैं। इन नेताओं की चालाकियों की वजह से ही अनेक कश्मीरियों की मौत हुई है।
सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में कभी भी इन नेताओं के परिवार के सदस्य नहीं मारे गए। ऐसे नेता अब कश्मीरियां के आत्म सम्मान की दुहाई दे रहे हैं, जबकि कश्मीरियों को तो अनुच्छेद 370 के हटने के बाद ही सम्मान मिला है। अगस्त 2019 में जब 370 को हटाया गया, तब पाकिस्तान ने भी हालात बिगाडऩे की बहुत कोशिश की थी, लेकिन तब कश्मीरियों के सहयोग की वजह से पाकिस्तान को सफलता नहीं मिली। असल में कश्मीरी भी पाकिस्तान में रह रहे मुसलमानों के हालात देख रहे हैं। भारत में मुसलमान बहुत सुकून और सम्मान के साथ रह रहा है। किसी भी स्तर पर मुसलमानों से भेदभाव नहीं होता। सरकारी नौकरी हो या विकास की कोई योजना। सभी में मुसलमानों को समान अधिकार हैं।







