6 नगर निगम में गैर पार्षद भी बन सकते हैं मेयर। जरुरत होने पर हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग होगा-मंत्री शांतिधारीवाल।

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  • सचिन पायलट के विरोध के चलते गत वर्ष 49 स्थानीय निकायों के चुनाव में हाईब्र्रिड फार्मूले का उपयोग नहीं हो सका था।
  • निगम चुनाव के बाद शहरी क्षेत्रों में कैम्प लगाकर भूखंडों के पट्टे दिए जाएंगे।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 3 नवम्बर को होने वाले राजस्थान के 6 नगर निगमों के मेयर के चुनाव में गैर पार्षद भी मेयर पद पर आसीन हो सकता है। इस बात के संकेत 16 अक्टूबर को प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने दिए हैं। धारीवाल ने बताया कि सरकार ने गत वर्ष जो हाईब्रिड कानून बनाया था वह आज भी लागू है। हाईब्रिड फार्मूले से शहर वासियों को अनुभवी और योग्य मेयर मिल सकेगा। लेकिन 6 नगर निगम के चुनावों में जरुरत होने पर ही हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग किया जाएगा। सरकार के हाईब्रिड फार्मूले का मतलब है कि यदि किसी निगम में नवनिर्वाचित पार्षद मापदंडों पर खरा नहीं उतरता है तो गैर पार्षद को भी मेयर का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

 

 

 

लेकिन गैर पार्षद निर्धारित आरक्षित वर्ग का ही होना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि एससी वर्ग के लिए आरक्षित मेयर के पद पर सामान्य वर्ग के नेता को बैठा दिया जाए। बहुमत वाला राजनीतिक दल आरक्षित वर्ग के ही गैर पार्षद को मेयर का उम्मीदवार बना सकता है। हाईब्रिड फार्मूला सत्तारुढ़ दल के लिए मददगार होता है। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार गत वर्ष नवम्बर में हुए 49 स्थानीय निकायों के चुनावों में भी हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग करना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने सरकार के इस फैसले का खुला विरोध किया। पायलट का कहना रहा कि निर्वाचित पार्षद में से ही निकाय प्रमुख का चयन होना चाहिए।

 

 

 

यदि गैर पार्षद को निकाय प्रमुख बना दिया जाता है तो यह जनता के साथ वायदा खिलाफी होगी। पायलट के विरोध को देखते हुए गत वर्ष सरकार ने हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग नहीं किया। लेकिन अब सचिन पायलट न तो प्रदेश अध्यक्ष हैं और न डिप्टी सीएम। कांग्रेस में अब पायलट की पहले जैसे मजबूत स्थिति भी नहीं है। ऐसे में सरकार हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग आसानी से कर सकती है। यदि 3 नवम्बर को होने वाले 6 नगर निगम के चुनावों में हाईब्रिड फार्मूले का उपयोग होता है तो फिर शेष 129 स्थानीय निकायों में भी इसी फार्मूले का उपयोग हो जाएगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि 129 निकायों का कार्यकाल गत 20 अगस्त को ही समाप्त हो गया है। सरकार अब कभी भी इन निकायों में भी चुनाव करवा सकती है।

 

 

मिलेंगे पट्टे:
16 अक्टूबर को नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि जयपुर जोधपुर और कोटा के छह निगमों के चुनाव सम्पन्न हो जाने के बाद शहरी क्षेत्रों में कैम्प लगाकर पट्टों का वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार शहरी क्षेत्र के लोगों की हर समस्या का समाधान करने के लिए तत्पर है।

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