- प्रशासन के पास लाश निकालने का पैसा नहीं।
- सरकार की संवेदनहीनता पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी अफसोस जताया।
- 75 वर्षीय मां चुन्नी बाई का रो रो कर बुरा हाल।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 16 अक्टूबर को भी श्रमिक मूपाराम मीणा का शव निर्माणाधीन कुए से बाहर नहीं निकाला जा सका है। जिस कुए में श्रमिक मूपाराम गिरा, वह पाली जिले के कानपुरा गांव का है। जबकि श्रमिक सिरोही जिले का रहने वाला है। पूर्व मंत्री ओटाराम देवासी ने बताया कि 27 सितम्बर को मूपाराम कुए में गिरा था, तभी प्रशासन को सूचना दे दी गई। यहां तक कि कलेक्टर अंशदीप को सूचित कर दिया गया, लेकिन इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा कि 19 दिन बाद भी शव को कुए से बाहर नहीं निकाला जा सका। देवासी का आरोप है कि प्रशासन पैसे के अभाव में शव को बाहर नहीं निकाल रहा है।
चूंकि शव निकालने के लिए काम आने वाली मशीनों पर 5-7 लाख रुपए खर्च होंगे, इसलिए प्रशासन कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। देवासी ने इस संबंध में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का भी ध्यान आकर्षित किया है। राजे ने भी शव न निकाले जाने पर अफसोस जताया है। राजे ने भरोसा दिलाया कि वे कलेक्टर से बात करेंगी। देवासी ने निर्दलीय विधायक संयम लोढा की दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी से भी पूर्व सीएम राजे को अवगत करवाया है। देवासी के अनुसार संयम लोढा ने श्रमिक के परिजनों से कहा है कि आप लोग गांव में भी तो अंतिम संस्कार करते। अब इसी कुए में अंतिम संस्कार भी हो गया है। शव को कुए से बाहर निकालने को लेकर श्रमिक की 75 वर्षीय मां चुन्नी बाई का रो रो कर बुराहाल है।
बूढी मां के आंसुओं को देखकर भी प्रशासन के किसी भी अधिकारी का दिल नहीं पसीज रहा है। पाली के प्रभारी मंत्री सालेह मोहम्मद हैं। ग्रामीणों ने सालेह मोहम्मद को पूरी घटना से अवगत करवा दिया है, लेकिन इसके बाद भी शव को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिली है। अनेक ग्रामणों को कलेक्टर अंशदीप के व्यवहार से भी नाराजगी है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या प्रशासन इतना भी समर्थ नहीं है कि एक श्रमिक के शव को कुए से निकाल सके? या फिर प्रशासन गरीब श्रमिक का कोई महत्व नहीं समझता है। इसे वाकई अफसोसनाक कहा जाएगा कि 19 दिन बाद भी शव को कुए से बाहर नहीं निकाला गया है।
दैनिक समाचार पत्रों में रोजाना खबरें छप रही हैं, लेकिन ऐसी खबरों का प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को संवेदनशील इंसान माना जाता है। जब पूरा मामला प्रभारी मंत्री सालेह मोहम्मद की नजर में है तो फिर मुख्यमंत्री की जानाकरी में क्यों नहीं लाया जाता? ग्रामीणों का भरोसा है कि यदि सीएम गहलोत को जानकारी होगी तो वे एक गरीब परिवार की सुध लेंगे। सोशल मीडिया पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और पूर्वमंत्री ओटाराम देवासी के मध्य मोबाइल पर हुई बात भी वायरल हो गई है।







