जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से दिल्ली के लोधी स्टेट वाला सरकारी बंगला खाली करवाया जा रहा है। यदि 30 जून के बाद प्रियंका वाड्रा इस बंगले में रहती हैं तो उन्हें किराया चुकाना होगा। किराया देकर भी प्रियंका सिर्फ एक माह तक ही बंगले में रह सकती है। यानि 31 जुलाई तक प्रियंका को बंगला खाली करना ही पड़ेगा।
प्रियंका से यह बंगला इसलिए खाली करवाया जा रहा है कि अब प्रियंका को एसपीजी की सुरक्षा नहीं है। डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में प्रियंका को एसपीजी की सुरक्षा देते हुए टाइप 68 का बंगला उपलब्ध करवाया गया था। लेकिन एसपीजी की सुरक्षा हटने के बाद प्रियंका वाड्रा टाइप 68 के बंगले की हकदार नहीं है। अब प्रियंका को जेड प्लस की सुरक्षा है, जिसमें सरकारी आवास मुफ्त में नहीं मिल सकता है। हालांकि प्रियंका से नियमों के तहत ही बंगला खाली करवाया जा रहा है, लेकिन पूरी कांग्रेस गुस्से में हैं। आरोप है कि राजनीतिक द्वेषता से मोदी सरकार प्रियंका से बंगला खाली करवा रही है।
प्रियंका से बंगला खाली करवाने पर कांग्रेस के नेता चाहे जितना गुस्सा उतारे, लेकिन राजस्थान में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती वसुंधरा राजे पर पूरी तरह मेहरबान है। यही वजह है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी वसुंधरा राजे जयपुर स्थित सिविल लाइन का बंगला संख्या 13 खाली नहीं करवाया जा रहा है। राजे ने यह बंगला वर्ष 2013 से 2018 के बीच मुख्यमंत्री रहते हुए हथिया लिया था। मुख्यमंत्री, राज्यपाल आदि के सरकारी बंगलो के निकट बंगला संख्या 13 पर राजे ने पूरे पांच साल अपना कब्जा जमाए रखा, जबकि वे मुख्यमंत्री के लिए आरक्षित बंगला संख्या 8 का भी इस्तेमाल करती रही।
मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए राजे ने बंगला संख्या 13 में सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा ली। बाद में यही बंगला अशोक गहलोत की सरकार ने वसुंधरा राजे को पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से आवंटित कर दिया। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर 6 माह पहले फैसला दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से मुफ्त में सरकारी बंगला आवंटित नहीं हो सकता और न ही कोई सुविधा ली जा सकती है। लेकिन इसके बावजूद भी अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे को बंगला संख्या 13 में टिकाए रखा है।
गहलोत अब ऐसा रास्ता निकाल रहे हैं ताकि वसुंधरा राजे स्थायी तौर पर बंगले में रह सके। गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर कहा भी है कि हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से राजे को बंगला देने से मना किया है, लेकिन वसुंधरा राजे को विधायक होने के नाते तो सरकारी बंगला मिल ही सकता है। सवाल उठता है कि गहलोत वसुंधरा राजे पर इतने मेहरबान क्यों हैं? और वह भी तब जब दिल्ली में उनकी पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी से बंगला खाली करवाया जा रहा है। एक ओर जयपुर में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को सरकारी बंगले में बनाए रखने के लिए कांग्रेस सरकार गली निकाल रही है तो दूसरी ओर प्रियंका गांधी से बंगला खाली करवाने को लेकर गुस्सा जताया जा रहा है। य
हां यह खास तौर से उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश में कोर्ट के आदेश के बाद ही बसपा प्रमुख मायावती और अखिलेश यादव से सरकारी बंगला खाली करवाए गए थे। इन दोनों ने भी वसुंधरा राजे की तरह पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लखनऊ में सरकारी बंगले हासिल किए थे। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों से कोई मित्रता नहीं निभाई और कोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए बंगला खाली करवा लिए। कायदे से तो हाईकोर्ट के आदेश के बाद नैतिकता दिखाते हुए वसुंधरा राजे को बंगला संख्या 13 खाली कर देना चाहिए था। लेकिन राजे जैसी नेता से नैतिकता की उम्मीद रखना बेमानी है। वैसे भी जब कांग्रेस सरकार के सीएम अशोक गहलोत मेहरबानी कर रहे हों, तब राजे को नैतिकता दिखाने की क्या जरुरत है?







