सरकारी दफ्तरों में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों को व्यापारी ही पकड़वा सकते हैं।

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भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए उदयपुर के एसीबी के डीआईजी हिंगलाजदान बारहट ने व्यापारियों से संवाद किया।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान के उदयपुर स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के डीआईजी हिंगलाजदान बारहट ने 20 अक्टूबर को भ्रष्टाचार को रोकने के लिए शानदार और प्रभावी पहल की है। इस पहल का प्रदेश भर में अनुसरण हो सकता है। बारहट ने उदयपुर के प्रमुख व्यापारियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं जानी बारहट जानना चाहते थे कि किसी सरकारी दफ्तर में व्यापारी कैसे काम करवाते हैं।

 

 

 

बारहट का व्यापारियों को कहना रहा कि निसंकोच होकर अपनी बात रखें। यदि किसी सरकार विभाग में काम करने के बदले में रिश्वत मांगी जाती है तो इसकी सूचना तत्काल एसीबी को दी जाए। डीआईजी बारहट की इस पहल का उदयपुर के व्यापारियों ने स्वागत किया है। संभवत: ऐसे पहली बार हुआ है जब भ्रष्टाचार को रोकने के लिए व्यापारियों से सहयोग मांगा गया है। बारहट ने जो प्रभावी पहल की है उसके परिणाम आने वाले दिनों में सामने आएंगे। लेकिन बारहट की यह पहल भ्रष्टाचार को रोकने में कारगर साबित हो सकती है।

 

 

 

असल में संबंधित विभाग के बड़े अधिकारी भी नियमानुसार होने वाले काम को भी नहीं करते हैं। इसलिए पीडि़त व्यक्ति नीचे के स्तर पर रिश्वत देकर अपना काम करवा लेता है। रिश्वत देने का सबसे ज्यादा अनुभव व्यापारी समुदाय को ही होता है। यह बात अलग है कि संबंधित व्यापारी रिश्वत की शिकायत किसी से भी नहीं करता है। यदि संबंधित विभाग का बड़ा अधिकारी नियमानुसार होने वाले कामों को कर दे तो भ्रष्टाचार अपने आप समाप्त हो जाएगा। पीड़ा तब होती है, जब एक ही प्रकृति के काम करने में भेदभाव किया जाता है। रिश्वत देने वाले व्यक्ति का काम हो जाता है, लेकिन जो व्यक्ति रिश्वत नहीं देता उसका काम नहीं होता। एक ही प्रकृति के दो कामों का भेदभाव बड़े अधिकारी के सामने लाने पर भी पीडि़त व्यक्ति को कोई राहत नहीं मिलती है।

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