- डीजीपी की नियुक्ति देने में उलझी गहलोत सरकार। प्रदेश में 14 अक्टूबर से स्थायी डीजीपी भी नहीं।
- मुख्य सचिव राजीव स्वरूप का एक्सटेंशन भी केन्द्र सरकार में लम्बित।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिस तरह से प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे केन्द्र सरकार नाराज है। अब केन्द्र सरकार ने भी तय किया है कि गहलोत सरकार को मनमर्जी नहीं करने दी जाएगी। यही वजह है कि राज्य में पुलिस निदेशक की नियुक्ति के लिए पूर्व में जो पैनल भेजा गया था, उसमें संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे फिलहाल राजस्थान में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का मामला उलझ गया है। डीजीपी की नियुक्ति के मामले में भी गहलोत सरकार का मनमाना रवैया सामने आया है। डीजीपी पद को लेकर मुख्यमंत्री ने ऐसे निर्णय लिया जैसी किसी खेत से मूली उखाड़ कर फेंक दी जाती है।
सब जानते हैं कि सीएम गहलोत ने पहले भूपेन्द्र यादव का डीजीपी के पद पर दो वर्ष का सेवा विस्तार करवाया। इसके लिए केन्द्र सरकार से अनुमति भी ली, लेकिन जब राजनीतिक कारणों से एमएल लाठर को डीजीपी बनाने की जरुरत हुई तो भूपेन्द्र यादव से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति का आवेदन करवा दिया। यादव ने अपने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति आवेदन में लिखा कि 20 नवम्बर 2020 तक सेवा निवृत्ति दे दी जाए। लेकिन गहलोत सरकार को एमएल लाठर को डीजीपी के पद पर नियुक्ति करने की इतनी जल्दबाजी थी कि 14 अक्टूबर को भूपेन्द्र यादव को डीजीपी का पद त्यागना पड़ा। सीएम गहलोत ही बता सकते हैं कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की तिथि से भी 37 दिन पहले भूपेन्द्र यादव को क्यों हटाया गया? इसे राज्य सरकार का मनमाना रवैया ही कहा जाएगा कि केन्द्र सरकार से पैनल नहीं आने के बाद भी एमएल लाठर को डीजीपी का अतिरिक्त चार्ज दिलवा दिया गया।
यानि मौजूदा समय में गत 14 अक्टूबर से राजस्थान में स्थायी डीजीपी नहीं है। जहां तक भूपेन्द्र यादव का सवाल है तो राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद मिल गया है। 14 अक्टूबर को यादव ने सुबह डीजीपी का पद छोड़ा और शाम को अजमेर आकर आयोग का पद ग्रहण कर लिया। अब यादव आरएएस और आईपीएस अधिकारियों के चयन के साथ साथ सरकारी भर्तियां करेंगे। चूंकि यादव को आयोग के अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी मिल गई है, इसलिए खेत से उखाडऩे पर भी ऐतराज नहीं है। गहलोत सरकार को उम्मीद थी कि केन्द्र सरकार डीजीपी का पैनल स्वीकृत कर भेज देगी तो लाठर को स्थायी नियुक्ति मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
केन्द्र सरकार ने मुख्यमंत्री का मनमाना रवैया देखते हुए डीजीपी के पैनल को संशोधित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार से कहा गया है कि डीजीपी के पैनल में 1987 बैच के आईपीएस अक्षय कुमार मिश्रा का नाम भी शामिल किया जाए। असल में एमएल लाठर वाला जब पैनल भेजा गया था, तब मिश्रा का नाम शामिल नहीं किया गया, क्योंकि मिश्रा के रिटारयमेंट में 6 माह से भी कम का समय था। लेकिन 20 नवम्बर के बजाए 14 अक्टूबर को ही भूपेन्द्र यादव ने डीजीपी का पद छोड़ दिया, तब अक्षय कुमार मिश्रा के रिटायरमेंट में 6 माह से अधिक का समय हो गया भले ही अशोक गहलोत मिश्रा को डीजीपी नहीं बनाए, लेकिन उन्हें मिश्रा का नाम शामिल करना ही पड़ेगा। मौजूदा समय में मिश्रा दिल्ली में आईबी के एडिशनल डायरेक्टर हैं।
मुख्य सचिव की फाइल भी लम्बित:
राजस्थान के मुख्य सचिव राजीव स्वरूप के सेवा विस्तार की फाइल भी केन्द्र सरकार के पास लम्बित पड़ी है। सब जानते हैं कि जब मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की सेवा निवृत्ति में मात्र ढाई माह शेष थे, तब गुप्ता को अचानक मुख्य सचिव के पद से हटा दिया गया। रातों रात राजीव स्वरूप को मुख्य सचिव बना दिया गया। जबकि राजीव स्वरूप की सेवानिवृत्ति में 8 माह शेष थे। अब सीएम गहलोत चाहते हैं कि राजीव स्वरूप को सेवा विस्तार मिल जाए। इसीलिए केन्द्र के पास फाइल भेजी गई है। गहलोत सरकार के प्रस्ताव पर राजीव स्वरूप को सेवा विस्तार मिलता है या नहीं यह तो समय ही बताएगा, लेकिन मुख्य सचिव के पद से हटाए जाने के बाद भी डीबी गुप्ता खुश हैं, क्योंकि अब उन्हें प्रदेश का मुख्य सूचना आयुक्त बनाया जा रहा है।
गुप्ता विगत दिनों आईएएस सेवा से भी रिटायर हो चुके हैं, लेकिन सीएम गहलोत ने उन्हें अपना सलाकार बना रखा है। आईएएस और आईपीएस सेवा से रिटायरमेंट के बाद सरकार में फिर से पुनर्वास हो जाए तो अच्छे अच्छे अधिकारी स्वाभिमान को ताक में रख देते हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए 25-30 वर्षों तक जो आईपीएस और आईएएस अपने अधिनस्थों को ईमानदारी नैतिकता, स्वाभिमान आदि का पाठ पढ़ाते रहे, लेकिन जब उन्हें इन्हीं मुद्दों पर परीक्षा देने की जरुरत हुई तो आत्म समर्पण कर दिया। जब आईएएस और आईपीएस जैसे अधिकारी सब कुछ सहने को तैयार हों तो फिर मनमाना रवैया तो अपनाया जाएगा। महात्मा गांधी के सिद्धांत अपने लिए नहीं होते हैं। अपना मकसद तो सिर्फ सरकार को बचाए रखना है।







