राजस्थान में गहलोत सरकार दलीय आधार पर चुनाव नहीं करवाने की फिराक में।

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जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव की घोषणा तो हो गई, लेकिन उम्मीदवारों के सिंबल को लेकर असमंजस की स्थिति।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में पंचायतीराज से जुड़े जिला परिषद व पंचायत समिति के सदस्यों के चुनाव की घोषणा तो हो गई, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया क्या होगी, इसको लेकर अभी असमंजस बना हुआ है।

 

जानकार सूत्रों के अनुसार अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार चाहती है कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव दलीय आधार पर न करवाए जाएं। जिस प्रकार सरपंच पद के चुनाव होते हैं, उसी प्रकार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव करवा लिए जाए। इससे यह पता ही नहीं चलेगा कि चुनाव में किस दल की हार हुई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि जब चुनाव की घोषणा हो गई है तब सरकार को चुनाव की प्रक्रिया भी स्पष्ट करनी चाहिए।

 

डॉ. पूनिया ने कहा कि कांग्रेस को हार का डर है, इसलिए पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव दलीय आधार पर नहीं करवाए जा रहे हैं। पूनिया ने कहा कि 3 नवम्बर को हो रहे 6 नगर निगमों के चुनाव में भाजपा की जीत तय है। कांग्रेस को अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी हार का डर सता रहा है, इसलिए दलीय आधार पर चुनाव नहीं करवाए जा रहे।

 

डॉ. पूनिया ने कहा कि 21 जिलों में पंचायतीराज के चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए सरकार को जल्द से जल्द असमंजस की स्थिति दूर करनी चाहिए। मालूम हो कि प्रदेश के 21 जिलों में पंचायतीराज के चुनाव की अधिसूचना 4 नवम्बर को जारी हो जाएगी। 23 और 27 नवम्वबर को पहले और दूसरे चरण का मतदान होगा, जबकि 1 व 5 दिसम्बर को तीसरे और चौथे चरण का मतदान होगा। सदस्यों के चुनाव के बाद प्रधान और जिला प्रमुख के पद के चुनाव होंगे।

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