- सिणगारी के सरकारी स्कूल में अनुपस्थित रहने वाले 11 शिक्षकों को दी थी चार्जशीट।
- आम लोगों में संभागीय आयुक्त की हो रही है प्रशंसा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राज्य सरकार के निर्देश पर इन दिनों राजस्थान के सभी संभागीय आयुक्त सरकारी कार्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर रहे हैं। इसके अंतर्गत जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा ने हाल ही में पाली जिले के सिणगारी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। सरकारी स्कूल खुलने का समय प्रात: साढ़े सात बजे का है। डॉ. शर्मा स्कूल का निरीक्षण करने के लिए प्रात: 8:25 पर पहुंचे तो 16 में से 11 शिक्षक अनुपस्थित मिले। अनुपस्थित शिक्षकों को लेकर स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति गोस्वामी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
डॉ. शर्मा ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब उनकी कार स्कूल परिसर में प्रवेश कर रही थी, तब प्रिंसिपल ने अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की मार्किंग उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज कर दी। डॉ. शर्मा ने जब सरकार के स्माइल और ईशिक्षा प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी मांगी तो प्रिंसिपल गोस्वामी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। डॉ. शर्मा ने प्रिंसिपल से पूछा कि सरकार आपको प्रतिमाह कितना वेतन देती है तो गोस्वामी ने बताया कि 89 हजार रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार प्रतिमाह इस स्कूल के 16 शिक्षकों पर कितनी राशि खर्च करती है।
ऐसे में यदि शिक्षक वर्ग समय पर स्कूल नहीं आए तो फिर क्या होगा? यह माना कि शिक्षकों से स्कूल के बाहर के कार्य भी करवाए जाते हैं, लेकिन यह भी सही है कि कोरोना की वजह से अप्रैल माह से स्कूलों में विद्यार्थी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सरकार ने ईशिक्षा प्रोजेक्ट शुरू किया है, लेकिन सब जानते हैं कि सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को ईशिक्षा नहीं मिलती है। लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूलों में या तो वेतन रोक दिया है या फिर आधा दिया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पूरा वेतन मिल रहा है। स्कूल में बच्चे आए या नहीं, लेकिन वेतन प्रतिमाह मिल रहा है।
तृतीय श्रेणी के शिक्षक को भी न्यूनतम 50 हजार रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं। सरकारी स्कूल के शिक्षक अपनी तुलना किसी प्राइवेट स्कूल के शिक्षक से करेंगे तो उन्हें अपने आनंद का अंदाजा हो जाएगा। जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. शर्मा ने इन दिनों जितनी भी सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया तो कमोबेश सिणगारी जैसे हालात ही देखने को मिले। जाहिर है कि सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है। क्या ऐसे में दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? लेकिन पाली में कुछ कर्मचारी नेता अपने निहित स्वार्थों के खातिर संभागीय आयुक्त के आकस्मिक निरीक्षण अभियान का विरोध कर रहे हैं। ऐसे नेताओं का कहना है कि संभागीय आयुक्त को पूर्व में सूचना देेकर आना चाहिए। कहा जा रहा है कि डॉ. शर्मा संभागीय आयुक्त का रौब दिखाने के लिए आकस्मिक निरीक्षण कर रहे हैं।
नेताओं के अपने तर्क हो सकते हैं, लेकिन आम लोगों में डॉ. शर्मा की कार्यशैली की प्रशंसा हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों के हाल किसी से छिपे नहीं है। शिक्षकों की मर्जी होती है तो स्कूल आते हैं। प्रिंसिपल के संरक्षण की वजह से दो तीन दिन में एक बार आकर उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर देते हैं। जबकि नियमों के अनुसार स्कूल नहीं आने वाले शिक्षक की अनुपस्थिति सुबह ही दर्ज हो जानी चाहिए। सकार करोड़ों रुपए खर्च कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल चला रही है। यदि 60-70 हजार रुपए प्रतिमाह लेने वाले शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आएंगे तो फिर विद्यार्थी के भविष्य का क्या होगा?
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