जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा के आकस्मिक निरीक्षण से नाराज है कुछ शिक्षक।

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  • पाली के जिस सिणगारी स्कूल में 11 शिक्षक अनुपस्थित मिले उस स्कूल की प्रिंसिपल 6 दिन बाद अस्पताल में भर्ती हुई।
  • तीन घंटे बाद डॉक्टर ने प्रिंसिपल को छुट्टी दी।
  • सरकार के दिशा निर्देशों पर भी आपत्ति।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – जोधपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा ने 21 अक्टूबर को पाली जिले के सिणगारी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में 11 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए थे। अब इस प्रकारण में 27 अक्टूबर को उस समय नया मोड़ आ गया, जब स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति गोस्वामी रोहट सामुदाय अस्पताल में भर्ती हो गई।

 

प्रिंसिपल का कहना रहा कि संभागीय आयुक्त के आकस्मिक निरीक्षण की घटना से वे डिप्रेशन में आ गई है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बाघाराम पटेल ने प्रिंसिपल के स्वास्थ्य की जांच पड़ताल की और तीन घंटे बाद छुट्टी दे दी। डॉ. पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रिंसिपल गोस्वामी फिट हैं। हालांकि शरीर में कमजोर बताकर प्रिंसिपल ने ग्लूकोज की बोतल चढ़वाई। मालूम हो कि संभागीय आयुक्त डॉ. शर्मा ने राज्य सरकार के दिशा निर्देशों के अंतर्गत 21 अक्टूबर को सिणगारी के स्कूल का आकस्मिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए 11 शिक्षकों को चार्जशीट भी दी गई।

 

इस कार्यवाही से अनेक शिक्षकों में नाराज़गी है। कुछ शिक्षक मानते हैं कि डॉ. शर्मा ने प्रिंसिपल गोस्वामी के साथ रुखा और सख्त व्यवहार किया। वहीं कुछ शिक्षकों का कहना है कि कोरोना काल में राज्य सरकार ने जो दिशा निर्देश दे रखे हैं, वे व्यवहारिक नहीं है। 21 अक्टूबर को डॉ. शर्मा प्रात: सवा आठ बजे ही सिणगारी स्कूल पहुंच गए और ईशिक्षा के बारे में जानकारी मांगी। जबकि ईशिक्षा के दिशा निर्देशों के अंतर्गत विद्यार्थियों के वाट्सएप ग्रुप में प्रात: 9 बजे कनटेंट पोस्ट किए जाते हैं। ऐसे कनटेंट शिक्षा विभाग से प्रात: 8:30 बजे प्राप्त होते हैं। शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि ईशिक्षा के दिशा निर्देश व्यवहारिक नहीं है।

 

सरकारी खास कर ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले अधिकांश विद्यार्थियों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं होता है। जब विद्यार्थियों के पास एंड्रॉयड फोन ही नहीं होगा, तो फिर वाट्सएप ग्रुप कैसे बनेंगे। हालांकि स्कूल के शिक्षक अपने खर्चे पर एंड्रॉयड फोन का उपयोग कर रहे हैं। यहां तक कि नेट का डाटा भी स्वयं खरीदते हैं। कोरोना काल में विद्यार्थियों के स्कूल आने पर रोक है, इसलिए ईशिक्षा के माध्यम से ही पढ़ाई करवाई जा रही है। शिक्षकों ने जैसे तैसे पढ़ाई करवाई तो सरकार ने पाठ्यक्रम में चालीस प्रतिशत की कटौती कर दी। सवाल उठता है कि पूर्व में जो पढ़ाई करवाई गई उसका अब क्या होगा। सरकार के ऐसे निर्णय ही शिक्षकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।

 

आईएएस आर्य और सोनी के नाम का इस्तेमाल:
21 अक्टूबर को संभागीय आयुक्त डॉ. शर्मा के आकस्मिक निरीक्षण पर शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुप और फेसबुक, ट्वीटर आदि पर भी वाद-विवाद हो रहा है। अनेक शिक्षक जहां डॉ. शर्मा के निरीक्षण को दोषपूर्ण बता रहे हैं, वहीं आम लोग आकस्मिक निरीक्षण की प्रशंसा भी कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि 21 अक्टूबर के निरीक्षण के बाद सरकार स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित होन लगी है। जो शिक्षक किन्हीं कारणों से छुट्टी ले रहे हैं वे एक दिन पहले अवकाश का प्रार्थना पत्र देने लगे हैं। सोशल मीडिया पर संभागीय आयुक्त के निरीक्षण को लेकर निरंजन आर्य और जीतेन्द्र सोनी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। शिक्षकों की ओर से यह दावा किया गया कि निरंजन आर्य अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) हैं और जीतेन्द्र सोनी नागौर के कलेक्टर हैं। लेकिन जब जांच पड़ताल हुई तो पता चला एसीएफ आर्य और कलेक्टर सोनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कुछ शिक्षकों ने शरारतपूर्ण तरीके से नाम का गलत इस्तेमाल किया।

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