लव जिहाद के विरुद्ध कानून बनाने का विरोध क्यों?

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  • क्या अपना धर्म छिपा कर दूसरे धर्म की लड़की से विवाह करना उचित है?
  • राज्यों में नहीं देश भर में बनना चाहिए कानून। सख्त सजा का हो प्रावधान।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों की सरकारों का कहना है कि जो लोग धर्म छिपाकर विवाह करते हैं, उन लोगों के खिलाफ कानून बनाया जाएगा। किसी भी व्यक्ति को बेटियों की इज़्ज़त से खेलने का अधिकार नहीं है। यूं तो धर्म छिपा कर विवाह करने की घटनाएँ लम्बे समय से हो रही है, लेकिन हरियाणा के वल्लभगढ़ में हाल ही में हुई एक घटना ने लोगों का गुस्सा सड़क पर ला दिया है। तौसिफ नाम के एक युवक ने अपने दोस्त रेहान के साथ मिलकर कॉलेज की छात्रा निकिता को सरे आम गोली मार दी। निकिता की मौके पर ही मौत हो गई।

 

 

आरोप है कि तौसिफ निकिता से जबरन शादी करना चाहता था। जब निकिता को तौसिफ के बारे में पता चला तो उसने इंकार कर दिया। हत्यारे तौसिफ को रिवाल्वर भी अजरू नामक व्यक्ति ने उपलब्ध करवाई। क्या ऐसे अपराधियों के विरुद्ध सख्त क़ानूनों में कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? लेकिन इसके उलट कुछ लोग लव जिहाद के विरुद्ध कानून बनाने का ही विरोध कर रहे हैं। समझ में नहीं आता कि कुछ लोग हर बार अपराधियों के पक्ष में आकर क्यों खड़े हो जाते हैं? भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र माना जाता है। यानि भारत में हर व्यक्ति अपने धर्म के अनुरूप रह सकता है। यानि हर व्यक्ति अपने धर्म के अनुरूप धार्मिक रस्में, निकाह, विवाह मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार भी कर सकता है।

 

 

आमतौर पर परिवार वाले अपने बच्चों के विवाह अपनी जाति, समुदाय में ही करते है। हालांकि उच्च शिक्षा और फिर विदेश पर किसी महानगर में नौकरी करने के कारण दूसरी जाति या समुदाय में भी विवाह होने लगे हैं। ऐसे विवाह बंधन भी प्रेम के कारण टूटने लगा है। यानि प्रेम करने वाले युवक-युवती दूसरे धर्म में भी निकाह-विवाह करने लगे हैं। लेकिन अब तो धर्म छिपा कर विवाह करने की घटनाएँ सामने आ रही है। पहले लड़की को प्रेम जाल में फँसाया जाता है फिर धोखे से विवाह कर लिया जाता है। लड़की को बाद में पता चलता है कि लड़का दूसरे धर्म का है।

 

 

जो लड़के अपना धर्म छिपा कर विवाह करते हैं उनके विरुद्ध ही सख्त कानून बानने की बात कही जा रही है। मौजूदा कानून में ऐसे लड़के अपराध करने के बाद बच निकलते हैं। या फिर अपने धर्म के अनुरूप तीन-चार निकाह-विवाह करने का फायदा उठाते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन उचित नहीं है। यह माना कि प्रेम की कोई भाषा और धर्म नहीं होता, लेकिन यदि प्रेम की आड़ में लड़कियों की इज़्ज़त लूटना ही उद्देश्य हो तो फिर ऐसे तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

 

अब लड़कियों को भी अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। लड़कियाँ यह देखे कि जिस लड़के से वे बातचीत कर रही है, वह किस परिवार का है। अनजान लड़को से लड़कियों को बातचीत नहीं करनी चाहिए। लड़की चाहे किसी भी धर्म की हो, लेकिन उसे अपने घर परिवार के मान सम्मान का ख्याल रखना चाहिए। जो लोग लव जिहाद के विरुद्ध बनने वाले कानून का विरोध कर रहे है, क्या वे चाहेंगे कि उनके परिवार की बेटी अत्याचार की शिकार हो जाए। असल में आज ऐसे कानून की देशभर में जरुरत है।

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