राजस्थान में लगातार तीसरे दिन भी गुर्जरों का आंदोलन जारी। दिल्ली-मुम्बई रेल मार्ग से लेकर भरतपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग भी जाम।

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  • पांच दिनों से 8 जिलों में बंद पड़ी है इंटरनेट सेवाएं।
  • गुर्जर समुदाय और राज्य सरकार एक दूसरे की ताकत को देख रहे हैं।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 3 नवम्बर को लगातार तीसरे दिन भी राजस्थान में गुर्जरों का आंदोलन जारी रहा। गुर्जर समुदाय अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गत 1 नवम्बर से भरतपुर के बयाना के निकट दिल्ली मुम्बई रेलमार्ग की पटरियों पर बैठा है। आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग भी जाम कर रखे हैं। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला और उनके पुत्र विजय बैंसला ने स्पष्ट कहा है कि सरकार ने गत वर्ष जो लिखित समझौता किया था, उसे लागू किया जाए। जब तक सरकार लिखित समझौते को लागू नहीं करेगी, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

 

 

गुर्जर समुदाय के आंदोलन से दिल्ली-मुम्बई रेल मार्ग से गुजरने वाली सभी ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है। जिसकी वजह से रेल यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। रेल को भी रिफंड करना पड़ रहा है। इसी प्रकार सड़क मार्ग जाम होने से लोगों को परेशानी हो रही है। हालांकि सरकार ने आंदोलनकारियों के आसपास सशस्त्र पुलिस का घेरा बना रखा है। लेकिन इससे आंदोलन कारियों के हौंसले पर कोई असर नहीं पड़ रहा। आंदोलन प्रभावित आठ जिलों में गत 29 अक्टूबर से ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर रखी हैं। इससे विद्यार्थियों को भी परेशानी हो रही है। कर्नल बैंसला ने साफ कहा है कि इन सब परेशानियों की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। सरकार ने गुर्जर समुदाय को सरकारी भर्तियों में पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण तो दिया है, लेकिन यह आधा अधूरा है।

 

 

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में भी गुर्जरों की मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन अब कांग्रेस सरकार अपने वायदे से मुकर रही है। हालांकि सरकार ने गुर्जर समुदाय से बातचीत करने की कोशिश की है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि गुर्जर समुदाय और सरकार दोनों ही एक-दूसरे की ताकत को देख रहे हैं। जहां तक गुर्जर समुदाय के लोगों का सवाल है तो इस बार धरना प्रदर्शन के लिए लम्बी तैयारी की गई है। जो लोग रेल पटरियों पर और सड़कों पर बैठे हैं, उन सब के लिए सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक की व्यवस्था की गई है। गुर्जर बहुल्य गांव में कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में भोजन बनाने का काम हो रहा है।

 

संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल बैंसला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी वे दिन में आंदोलनकारियों के बीच संवाद करने के लिए आते हैं। इस बार आंदोलन की कमान कर्नल बैंसला के पुत्र विजय बैंसला ने संभाल रखी है। वहीं दूसरे ओर सरकार भी गुर्जरों की ताकत को देख रही है। सरकार को लगता है कि सर्दी के दिनों में लम्बे समय तक रात और दिन धरने पर नहीं बैठा जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि गुर्जर थक कर वार्ता की टेबल पर आएंगे। सरकार की ओर से प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे हैं।

 

शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगों का समाधान वार्ता से ही निकलेगा। आंदोलनकारियों को टेबल पर वार्ता करने के लिए आना होगा। वहीं विजय बैंसला का कहना है कि गत वर्ष फरवरी में वार्ता के बाद ही सरकार से लिखित समझौता हुआ था। अब वार्ता का कोई मुद्दा ही नहीं है। सरकार अपने समझौते को लागू करे। बैंसला ने कहा कि छोटी छोटी मांगे हैं जिन्हें राज्य सरकार एक दिन में पूरा कर सकती है।

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