- बीपी सारस्वत और सुभाष काबरा ने मैदान छोड़ा।
- कांग्रेस में राम स्वरूप चौधरी का भी इंकार।
- किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक टाक की भी सक्रियता बढ़ी।
- केकड़ी में मंत्री पुत्र को लेकर असमंजस बरकरार।
- पंचायतीराज के चुनाव में 9 नवम्बर को नामांकन का अंतिम दिन।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) – जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 9 नवम्बर है, लेकिन अजमेर में किसी भी राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। जानकारी के अनुसार अजमेर देहात भाजपा के जिलाध्यक्ष देवी शंकर भूतड़ा ने 7 नवम्बर को जयपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया, राजेन्द्र राठौड़, वी सतीश आदि के साथ उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है। चूंकि जिला परिषद के सदस्य में कई दिग्गज भाजपा नेताओं ने टिकट मांगा है, इसलिए उम्मीदवार को 9 नवम्बर की सुबह ही सूचना दी जाएगी, जबकि जिले की पंचायत समितियों के वार्डों के उम्मीदवारों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
कई उम्मीदवारों ने 7 नवम्बर को नामांकन कर भी दिया है। चूंकि इस बार अजमेर का जिला प्रमुख का पद आरक्षित नहीं है, इसलिए भाजपा के सामान्य वर्ग के नेताओं में कुछ ज्यादा ही घमासान मचा हुआ है। जिला प्रमुख बनने का सपना देख रहे भाजपा नेताओं के लिए सह संतोष की बात है कि दो प्रमुख दोवदारों ने मैदान छोड़ दिया है। जबकि इन दोनों नेताओं के नामों पर आम सहमति हो गई थी। 6 वर्ष तक भाजपा के देहात जिलाध्यक्ष रहे प्रो. बीपी सारस्वत की उम्मीदवार वार्ड तीन से तय थी, लेकिन 7 नवम्बर को सरस्वत ने भाजपा संगठन को सूचित किया है कि वे जिला परिषद के सदस्य का चुनाव नहीं लड़ेंगे। असल में सारस्वत इन दिनों जोधपुर स्थित एम्स में कोविड का इलाज करवा रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार सारस्वत को 12 नवम्बर से पहले अस्पताल से छुटटी नहीं दी जा सकती है। छुट्टी के बाद सारस्वत को कम से कम 10 दिन होम क्वारंटीन रहना पड़ेगा। मालूम हो कि सारस्वत की जिला प्रमुख के पद पर मजबूत दावेदारी थी। सारस्वत ने गत लोकसभा का टिकट भी मांगा था। इसी प्रकार एकल विद्यालय के जिला संयोजक सुभाष काबरा ने भी वार्ड 30 से चुनाव लडऩे में असमर्थता जता दी है। काबरा ने चुनाव नहीं लडऩे के पारिवारिक कारण बताए हैं। काबरा की दावेदारी को भाजपा विधायक राम स्वरूप लाम्बा और सुरेश रावत का समर्थन था। नसीराबाद क्षेत्र के जिला परिषद के वाड्र में लोकप्रियता की वजह से काबरा चुनाव तो जीत जाते लेकिन, जिला प्रमुख तभी बनते जब भाजपा के प्रमुख दावेदारों में पेज फंसता। काबरा के इंकार करने के बाद माना जा रहा है कि पूर्व सदस्य राजेन्द्र सिंह रावत की उम्मीदवारी तय हो जाएगी।
जानकार सूत्रों के अनुसार पूर्व जिला प्रमुख श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के पति भंवर सिंह पलाड़ा की उम्मीदवारी वार्ड 1 से तय मानी जा रही है, जबकि वार्ड 2 से पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिय़ा पर मुहर लगाई जा रही है। भंवर सिंह पलाड़ा वार्ड संख्या 19 से अपने पुत्र शिवराज की भी उम्मीदवारी चाहते हैं। माना जा रहा है कि पलाड़ा परिवार में से किसी एक की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। असल में भाजपा के उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय विधायकों को प्राथमिकता दी गई है। जिले के पुष्कर, नसीराबाद और ब्यावर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के विधायक हैं। चुनाव जीताने की जिम्मेदारी भी इन्हीं विधायकों की होगी।
कांग्रेस में मंत्री प्रमोद जैन सक्रिय:
चूंकि अजमेर जिले में भी देहात कांग्रेस कमेटी भंग पड़ी है, इसलिए पंचायत राज चुनाव की पूरी कमान प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन के हाथों में है। 7 नवम्बर को ही जैन ने जयपुर में पूर्व विधायकों से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के नामों पर विचार विमर्श किया है। अलबत्ता कांग्रेस में कोई बड़ा नेता जिला परिषद के सदस्य के चुनाव में टिकिट नहीं मांग रहा है। पूर्व जिला प्रमुख राम स्वरूप चौधरी ने भी इंकार कर दिया है। चौधरी ने कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव लडऩे से मना किया है।
इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक सुरेश टाक भी कांग्रेस के टिकट बंटवारे में सक्रिय हो गए हैं। अब कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम तय करने में टाक की भी राय ली जा रही है। टाक कांग्रेस को ही समर्थन दे रहे हैं। जिले में केकड़ी और मसूदा में ही कांग्रेस के विधायक है। केकड़ी से चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा तथा मसूदा से राकेश पारीक विधायक हैं। केकड़ी में रघु के पुत्र सागर शर्मा ही सक्रिय रहते हैं, लेकिन अभी यह पता नहीं चला है कि मंत्री कौन से वार्ड से चुनाव लड़ेंगे। अलबत्ता केकड़ी की तीनों पंचायत समितियों और जिला परिषद के पांच वार्डों में उम्मीदवार के चयन में मंत्री पुत्र की ही राय मानी जाएगी।







