अजमेर में सचिन पायलट को डबल झटका।

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  • रावत नेता श्रवण सिंह भाजपा में शामिल तथा पूर्व विधायक राम नारायण गुर्जर का पुत्र सुनील उर्फ मोंटी धोखाधड़ी के प्रकरण में गिरफ्तार।
  • भाजपा विधायक सुरेश रावत ने अपनी स्थिति मजबूत की।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में कांग्रेस के सात वर्षों तक प्रदेश अध्यक्ष रहे सचिन पायलट को अजमेर में एक ही दिन में दो झटके लगे हैं। पायलट का अजमेर की राजनीति से गहरा रिश्ता रहा है। पायलट जब अजमेर के सांसद थे, तब केन्द्र में मंत्री भी बने। पायलट जब प्रदेश अध्यक्ष रहे तब अजमेर पर विशेष ध्यान केन्द्रित रखा। पायलट की पहल पर ही भाजपा के कद्दावर नेता श्रवण सिंह रावत कांग्रेस में शामिल हुए।

 

 

श्रवण सिंह कई सालों तक पायलट का झंडा लेकर घूमते रहे, लेकिन अब जब कांग्रेस की राजनीति में पायलट का पक्ष कमजोर हो रहा है, तब श्रवण सिंह वापस भाजपा में शामिल हो गए हैं। भाजपा तो जैसे श्रवण सिंह का इंतजार ही कर रही थी। 8 नवम्बर को दिन में श्रवण सिंह भाजपा में शामिल हुए तो शाम को अजमेर जिला परिषद के वार्ड संख्या 30 से श्रवण को भाजपा का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। अब जब सचिन पायलट को अपने समर्थकों की जरुरत है तब श्रवण सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी है। इसे अजमेर की राजनीति में पायलट को झटका ही माना जाएगा।

 

 

हालांकि सुनील गुर्जर उर्फ मोंटी की गिरफ्तारी से पायलट का कोई सरोकार नहीं है, लेकिन यह सही है कि सुनील गुर्जर कांग्रेस के पूर्व विधायक और अजमेर जिले के नसीराबाद क्षेत्र में लोकप्रिय नेता रामनारायण गुर्जर के पुत्र हैं। कांग्रेस की राजनीति में रामनारायण गुर्जर शुरू से ही सचिन पायलट के साथ हैं। जुलाई माह में जब पायलट कांग्रेस के 18 विधायकों को लेकर दिल्ली चले गए थे, तब अजमेर में सबसे पहले रामनारायण ने ही पायलट के प्रति अपना समर्थन जताया था। राजस्थान की एटीएस ने 7 नवम्बर की रात को सुनील गुर्जर उस समय गिरफ्तार किया, जब वह जयपुर एयरपोर्ट से दुबई भागने की फिराक में था।

सुनील गुर्जर पर उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में फर्जी टेंडर के नाम पर इंदौर और अहमदाबाद के व्यापारियों के साथ धोखाधाड़ी करने का आरोप है। यह भी सही है कि नसीराबाद क्षेत्र में राम नारायण गुर्जर की छवि साफ सुथरी है, लेकिन पुत्र की गिरफ्तारी का असर पिता की राजनीति पर पड़ता ही है।

रावत की स्थिति मजबूत:
श्रवण सिंह रावत के भाजपा में शामिल होने से अजमेर में पुष्कर के विधायक सुरेश सिंह रावत की स्थिति मजबूत हुई है। सुरेश और श्रवण के बीच रिश्तेदारी भी है। श्रवण सिंह के आने से पंचायतीराज के चुनाव में भाजपा को फायदा हो सकता है। हालांकि श्रवण के आने से भाजपा के पुराने नेता राजेन्द्र सिंह रावत नाराज हो गए हैं। अब भाजपा विधायक सुरेश रावत को सबक सिखाने के लिए राजेन्द्र रावत ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राजेन्द्र रावत पूर्व में जिला परिषद के सदस्य रहे हैं। राजेन्द्र रावत जिला परिषद के वार्ड संख्या 30 से टिकिट चाहते थे। लेकिन सुरेश रावत के दखल से श्रवण सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया।

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