- भारत में रोज़गार की नहीं, बल्कि कामगारों की कमी है-यशवंत शर्मा सीएमडी, श्री भगवती मशीन।
- अजमेर की तकनीक से जापान जैसा देश भी चकित है।
- 90 हजार स्क्वायर फिट ग्रे नाइट को प्रतिमाह तराशने की मशीन तैयार हो रही है।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) – आमतौर पर यह कहा जाता है कि भारत में रोजगार की कमी है। करोड़ों युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। बेरोजगारी की समस्या हर सरकार के लिए मुसीबत बनी रहती है। लेकिन मशीन तकनीक के विशेषज्ञ और देश के प्रमुख उद्यमी यशवंत शर्मा का मानना है कि भारत में रोजगार की कोई कमी नहीं है, उल्टे देश में कामगारों की कमी है। देश में आज भी ऐसी बहुत सी सामग्री है जो विदेशों से मंगाई जाती है। जबकि ऐसी सामग्री बहुत आसानी से भारत में तैयार हो सकती है। इसमें कोई खास तकनीक की जरुरत भी नहीं होती। यशवंत शर्मा अजमेर में ग्रेेनाइट पत्थर को काटने और पॉलिश करने वाली मशीनें बनाते हैं। यशवंत की इंजीनियरिंग की डिग्री और 200 करोड़ रुपए के वार्षिक करोबार के बारे में तो पाठकों को बताऊंगा ही, लेकिन पहले देश की बेरोजगारी की समस्या के समाधान में यशवंत के विचारों से अवगत करवा रहा हंू।
यशवंत ने बताया कि मशीने में हमें लोहे के पैनल बॉक्स की जरुरत होती है। इस बॉक्स में बिजली आदि के कनेक्शन होते हैं। खाली बॉक्स हम इटली जर्मनी आदि देशों से मंगाते हैं। इसी प्रकार लचीलेपन वाली बिजली की केबल भी चीन आदि देशों से मंगाई जाती है। इसमें बेल्ट भी शामिल हैं। अकेले उनका संस्थान ही प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की ऐसी सामग्री विदेश से मंगवाता है। सवाल उठता है कि क्या ऐसी साधारण वस्तुएं भारत में तैयार नहीं हो सकती? यशवंत ने बताया कि लोहे के पैनल बॉक्स तो भारत में भी बनते हैं, लेकिन भारत में बने बॉक्स में कुछ वर्षों में जंग लग जाता है।
असल में लोहे की चद्दर को तराशने में जो मेहनत विदेश में की जाती है, उतनी भारत में नहीं। इसी प्रकार भारत में बनी केबल में लचीलापन कम होता है, जिसकी वजह से केबल आए दिन खराब हो जाती है। यदि देश का युवा इस क्षेत्र में सक्रिय हो तो लाखों लोगों को रोजगार मिल सकता है। यशवंत ने माना कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अीिायान में युवाओं को ऐसे कामों के लिए प्रोहत्साहित किया जा रहा है। यशवंत का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में जिन वस्तुओं का आयात हुआ है उसका यदि अध्ययन किया जाए तो ऐसी अधिकांश वस्तुएं भारत में ही हो सकती है। भारतीयों को जल्दी करोड़पति बनने का मोह छोडऩा होगा। भारत का युवा अपने ही देश में करोड़पति तो बनेगा, लेकिन थोड़ी मेहनत करने के बाद। आज यशवंत अजमेर में बैठकर ग्रेनाइट काटने, पॉलिश करने आदि की मशीनें बना रहे हैं।
यशवंत की श्री भगवती मशीन प्रा.लि. में बनने वाली मशीनों ने चीन, इटली आदि देशों की मशीनों को पीछे छोड़ दिया है। यशवंत की फैक्ट्री में बनने वाली मशीनें तकनीक की दृष्टि से इटली, चीन आदि देशों से बहुत आगे हैं और मजबूती में कई गुना अच्छी हैं। यशवंत मानते हैं कि भारत में अभी दादा-पोते वाली प्रवृत्ति जागृत है। यानि आज जिस व्यक्ति ने मशीन खरीदी है, वह व्यक्ति चाहता है कि उसके बाद बेटा और पोता भी इसी मशीन का उपयोग करें। यानि उसे मजबूत मशीन चाहिए। श्रीभगवती मशीन फैक्ट्री में दादा पोते वाली मशीनें ही तैयार होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी मशीनों में नई तकनीक का समायोजन भी किया जा सकता है। यशवंत ने बताया कि ग्रेनाइट पत्थर को काटने वाली मशीन चीन से मंगाने पर मूल्य 37 लाख रुपए आता है, जबकि उनकी संस्थान 34 लाख रुपए में ही मजबूती की गारंटी वाली मशीन उपलब्ध करवा रही है। पत्थर कटने के बाद पॉलिश करने वाली मशीन की कीमत इटली में 4 करोड़ रुपए की है, जबकि उनकी संस्था मात्र डेढ़ करोड़ रुपए में मशीन उपलब्ध करवा रही है। इसी प्रकार ग्रेनाइट पत्थर को सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से कटर मशीन तक लाने में काम आने वाली क्रेन भी विदेश के मुकाबले में सस्ती है। ग्रेनाइट पत्थर कटिंग के एक प्लांट की न्यूनतम लागत 5 करोड़ रुपए तक की है। इस मशीन में एक लाख पाटर्स लगते हैं और उन सभी एक लाख पाटर्स को लगाने तथा चलाने की तकनीक की जानकारी है। ग्रेनाइट पत्थर की कटिंग की जो तकनीक पूरे विश्व में उन्होंने विकसित की है उसे जापान ने भी मान्यता दी है।
यह जापानियों की ईमानदारी है कि जो मेरी तकनीक काम में ली है। उसका श्रेय मुझे ही दिया है। मेरी तकनीक का उल्लेख जापान की फैक्ट्रियों में है। अब सवाल उठता है कि अजमेर स्थित श्रीभगवती मशीन प्रा.लि. के सीएमडी यशवंत शर्मा ने इंजीनियरिंग की डिग्री कहा से प्राप्त की? यशवंत बताते हैं कि उन्होंने बीकॉम तक पढ़ाई की, लेकिन वे अपने पिता भगवती शर्मा के साथ बिजली की बड़ी बड़ी मोटरों और ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने का काम करते थे। यशंवत के पिता की अजमेर में ही जयपुर रोड स्थित किशनगढ़ कोठी में इलेक्ट्रिक और लेथ मशीन की छोटी सी दुकान थी। पिता ने इलेक्ट्रिक की जो सीख दी उसे कम्प्यूटर के साथ प्रयोग किया और 200 करोड़ रुपए का वार्षिक करोबार किया है।
यशवंत इसे अपने पिता स्वर्गीय भगवती शर्मा का अशीर्वाद ही मानते हैं कि मांग के मुकाबले में मशीनों की सप्लाई कम है। यशवंत की फैक्ट्रियों में 600 से भी ज्यादा तकनीक कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन यदि किसी को पांच करोड़ रुपए की लागत वाला ग्रेनाइट कटर का प्लांट यशवंत शर्मा से लगवाना है तो उसे 6 माह इंतजार करना पड़ेगा। ऐसा बहुत कम होता है जब बगैर विज्ञापन के माल बिकता हो। यशवंत कभी मशीन की गुणवत्ता से समझौता नहीं करते। हालांकि यशवंत ने अपने विवेक से ग्रेनाइट कटिंग प्लांट में कई नई मशीनें तैयार की है, जिससे उद्यमियों का मुनाफा बढ़ा है। लेकिन अभी भी ऐसी मशीनों की जरुरत है जो ग्रेनाइट कटिंग के काम को और आगे ले जा सकती है। चूंकि उनके पास समय नहीं है, इसलिए वे चाहते हैं कि विवेक वाले युवा आगे आएं और रोजगार प्राप्त करें। ऐसे युवाओं को वे दिशा प्रदान कर सकते हैं।
यशवंत से उनकी सुविधा के अनुसार मेाबाइल नम्बर 9829070551 पर संवाद किया जा सकता है। वेबसाइट भगवाती मशीन्स डाट कॉम पर भी जानकारी ली जा सकती है।







