अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के मामले में हस्तक्षेप जरूरी है-सुप्रीम कोर्ट।

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  • क्या रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक आतंकवादी हैं?-हरीश साल्वे।
  • सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली के खिलाफ।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 11 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट में रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की जमानत को लेकर लम्बी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस चन्द्रचूड़ ने महाराष्ट्र सरकार की कार्यशैली को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियां की। अर्णब की गिरफ्तारी को गंभीर मानते हुए जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल जरूरी है, नहीं तो आप विनाश के रास्ते पर अग्रसर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि विचारों का मतभेद हो सकता है। लेकिन व्यक्ति की निजी आजादी हमेशा बनी रहनी चाहिए। यदि कोई चैनल आपको पसंद नहीं है तो आप नहीं देखें।

 

 

अर्णब की गिरफ्तारी के मामले में महाराष्ट्र सरकार की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। सिब्बल ने जो तर्क रखे उसी पर जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि सरकार किसी को निशाना नहीं बना सकती। उन्होंने जानना चाहा कि किसी व्यक्ति के पैसे बकाया है तो उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा कैसे दर्ज किया जा सकता है। क्या ऐसे मामले में आरोपी को पुलिस हिरासत में लिया जाना जरूरी है? जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट को भी संदेश देना चाहती है। अर्णब की याचिका पर मुम्बई हाईकोर्ट ने पचास पृष्ठ का फैसला तो दिया,लेकिन उसमें अर्णब के अपराध के बारे में कुछ भी नहीं लिखा। जस्टिस चन्द्रचूड़ ने अर्णब की गिरफ्तारी पर जो टिप्पणियां की उससे यह माना जा रहा है कि देश की सर्वोच्च अदालत से अर्णब को जमानत मिल जाएगी।

 

 

अर्णब को मुम्बई पुलिस ने चार नवम्बर को गिरफ्तार किया था। अर्णब ने पुलिस स्टेशन से लेकर जेल तक में मार पीट किए जाने का आरोप लगाया है। इस मामले में अर्णब की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पैरवी की। साल्वे ने सवाल उठाया कि क्या रिपब्लिक टीवी का प्रधान संपादक आतंकवादी है? उन्होंने कहा कि चूंकि रिपब्लिक टीवी ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ अनेक मुद्दों को उठाया इसलिए अर्णब गोस्वामी को बदनीयती से गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। साल्वे ने हाल ही में महाराष्ट्र रोडवेज के कर्मचारी के आत्म हत्या करने का मामला उठाते हुए पूछा कि क्या अब मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जाएगा? इस कर्मचारी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि सरकार द्वारा बकाया वेतन नहीं दिए जाने के कारण आत्महत्या कर रहा हंू। वकील हरीश साल्वे के तर्कों पर जस्टिस चन्द्रचूड़ ने भी स्वीकार किया कि अर्णब का मामला पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करने का नहीं है।

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