तो अब अर्णब गोस्वामी मराठी भाषा में भी शुरू करेंगे न्यूज चैनल।

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  • अर्णब के प्रकरण से महाराष्ट्र में शिवसेना और उद्धव ठाकरे की लोकप्रियता में कमी।
  • सात दिन ठाकरे की कैद में रहने के बाद भी अर्णब का हौसला बुलंद।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – आखिरकार 11 नवम्बर की रात को रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी जेल से बाहर आ ही गए। अर्णब को शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने गत 4 नवम्बर को बदनियती से जेल में डाला था। 11 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब की अंतरिम जमानत स्वीकार कर रिहा करने के आदेश दिए। सात दिन जेल में रहने के बाद भी अर्णब के हौसले बुलंद नजर आए। जेल से बाहर आते ही अर्णब ने भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे पूरे जोर से लगाए।

 

 

आमतौर पर जेल से छूटने के बाद व्यक्ति निराश और मायूस होता है, लेकिन अर्णब में पूरा जोश दिखा कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस, एनसीसी और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार से डरेंगे नहीं। सब जानते हैं कि अर्णब ने अपने रिपब्लिक टीवी न्यूज चैनलों पर पालघर में हुई साधुओं की हत्या, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेत्री दिशा सानियाल की आत्महत्याओं के प्रकरण में महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। इसके बाद ही अर्णब को एक पुराने मामले में जेल में डाल दिया। जेल से बाहर आते ही अर्णब ने घोषणा की कि अब वे देश की स्थानीय भाषाओं में भी न्यूज चैनल लांच करेंगे। यानि अब मराठी भाषा में भी रिपब्लिक टीवी शुरू होगा। स्वभाविक है कि मराठी भाषा का चैनल सम्पूर्ण महाराष्ट्र में देखा जाएगा।

 

 

मौजूदा समय में अर्णब के अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम के चैनल हैं। ये दोनों चैनल देश के नम्बर वन चैनल हैं। यानि हिन्दी में अर्णब का आर भारत देश में सर्वाधिक देखा जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अर्णब के चैनल भारत की सनातन संस्कृति के पक्षधर हैं। हो सकता है कि अर्णब की इस नीति से कांग्रेस और एनसीपी जैसे राजनीतिक दल सहमत नहीं हो, लेकिन शिवसेना को तो सनातन संस्कृति का पक्षधर माना जाता है। शिवसेना ने सीना ठो कर कहा था कि हमारे शिव सैनिकों ने ही अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराया है, लेकिन अब जिस तरह से सीएम उद्धव ठाकरे रिपब्लिक टीवी और अर्नब का विरोध कर रहे हैं, उससे शिवसेना की लोकप्रियता को नुकसान हो रहा है।

 

 

उद्धव ठाकरे माने या नहीं लेकिन अर्णब के प्ररकण में उन्हें काफी क्षति हुई है। इससे कांग्रेस और एनसीपी को कोई नुकसान नहीं हो रहा, क्योंकि उनकी सोच के बारे में तो सबको पता है। कांग्रेस और एनसीपी के लिए तो यह सुखद बात है कि शिवसेना ही अर्णब जैसे सनातनी को मार रही है। यही वजह है कि कांग्रेस और एनसीपी के नेता शिवसेना प्रमुख ठाकरे को उकसाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शिवसेना के कमजोर होने का फायदा भी कांग्रेस और एनसीपी को मिलेगा। महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की संयुक्त सरकार है, लेकिन अर्णब के प्रकरण में सबसे ज्यादा छवि शिवसेना की खराब हो रही है। अब जब अर्णब का चैनल मराठी भाषा में भी लांच होगा तो महाराष्ट्र के घर घर में अर्णब की आवाज गूंजेगी। महाराष्ट्र में मराठी भाषा के अनेक न्यूज चैनल लोकप्रिय हैं। उद्धव ठाकरे को अपनी जिद छोड़कर अर्णब के प्रकरण में दोबारा से विचार करना चाहिए।

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