तो फिर अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को सार्वजनिक तौर पर गद्दार मक्कार, धोखेबाज और नकारा क्यों कहा?

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  • इन गालियों के लिए आज तक खेद प्रकट नहीं किया है राजस्थान के मुख्यमंत्री ने।
  • कपिल सिब्बल के बयान पर गहलोत की टिप्पणी का मामला।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 17 नवम्बर को अखबारों में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का एक बयान छपा है। यह बयान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बयान का जवाब है। बिहार के आम चुनाव और कुछ राज्यों के उपचुनावों में मिली हार पर कपिल सिब्बल ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आत्म मंथन की सलाह दी। इस पर गहलोत का कहना रहा कि सिब्बल को ऐसे बयान सार्वजनिक तौर पर नहीं देने चाहिए। इससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है। ऐसी बातें पार्टी फोरम पर करनी चाहिए। गहलोत के बयान के साथ ही सवाल उठता है तो फिर गत जुलाई माह में गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर सचिन पायलट को गद्दार, मक्कार, नकारा और धोखेबाज क्यों कहा?

 

गहलोत ने मीडिया के सामने जब पायलट को इतनी गालियां दी, तब पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के साथ साथ डिप्टी सीएम भी थे। उस समय पायलट भले ही कांग्रेस के 18 विधायकों को लेकर दिल्ली चले गए, लेकिन पायलट ने कांग्रेस को लेकर कोई प्रतिकूल बात नहीं कही। पायलट का हमेशा यही कहना रहा कि वे अपनी बात कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को बताने के लिए दिल्ली गए हैं।

 

सीएम गहलोत आज जो उपदेश कपिल सिब्बल को दे रहे हैं, उस पर स्वयं उन्होंने जुलाई में अमल नहीं किया। गहलोत भी चाहते तो पायलट का मामला पार्टी फोरम पर उठा सकते थे। गहलोत माने या नहीं लेकिन पायलट के बारे में जो अपशब्द कहे, उससे कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हैं। हालांकि अब पायलट कांग्रेस के साथ ही खड़े हैं, लेकिन गहलोत ने अपने अपशब्दों पर अभी तक भी खेद प्रकट नहीं किया है।

 

आज मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए गहलोत कपिल सिब्बल को उपदेश दे रहे हैं, लेकिन अभी यदि गहलोत को सीएम के पद से हटा दिया जाए तो उनकी प्रतिक्रिया सिब्बल से भी बदत्तर होगी। गहलोत कितना तीखा बोलते हैं, इसका अंदाजा जुलाई-अगस्त में राजस्थान की जनता को हो चुका है। यह सही है कि कपिल सिब्बल को दोबारा से राज्यसभा में नहीं भेजा जा रहा है, इसलिए सिब्बल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाराज हैं। राजनीति में ऐसा होता ही है।

 

यह कोई अनोखी बात नहीं है, जो लोग महत्वपूर्ण पदों पर बैठे रहते हैं वे ही अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं, लेकिन जैसे ही नेता से पद छीन लिया जाता है, वैसे ही वह बागी तेवर दिखाता है। अशोक गहलोत उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं जो कांग्रेस को चलाने वाले गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे हैं। इस वफादारी के कारण ही दिसम्बर 2018 में सचिन पायलट का दावा दरकिनार कर गहलोत को राजस्थान का सीएम बनाया गया। अभी भी गांधी परिवार की मेहरबानी से ही गहलोत मुख्यमंत्री बने हुए हैं। राजस्थान में भाजपा नेताओं के बिखराव खासकर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की भूमिका की वजह से भी गहलोत को फायदा मिल रहा है।

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