राजस्थान में ऑनलाइन पढ़ाई भी बंद। फीस वसूली नहीं होने से हालात खराब।

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निजी स्कूल संचालकों का जयपुर में 8वें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा।
सरकार ने अभी तक कोई बातचीत नहीं की।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 17 नवम्बर को जयपुर में शहीद स्मारक पर राजस्थान भर के निजी स्कूल संचालकों का आमरण अनशन आठवें दिन भी जारी रहा। इस अनशन में प्रदेश के सभी 33 जिलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें महिला संचालक भी शामिल हैं। शहीद स्मारक के खुले परिसर में टेंट लगाकर अनशन किया जा रहा है।

 

 

कड़कड़ाती सर्दी में भी स्कूल संचालक रात और दिन बैठे हुए हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक भी कोई बात नहीं की है। निजी स्कूल संचालकों की एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रदेश के शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा संवेदनहीन मंत्री है, इसलिए स्कूल संचालकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। एक ओर लॉकडाउन की वजह से विद्यार्थियों से फीस नहीं लेने दी जा रही है तो दूसरी ओर शिक्षकों को वेतन देने का दबाव डाला जा रहा है। इतना ही नहीं स्कूल भवनों पर लगने वाला यूडी टैक्स से लेकर बिजली पानी के बिलों तक की वसूली की जा रही है। जिन संचालकों ने बैंकों से लोन ले रखा है उन्हें प्रतिमाह ब्याज का भी भुगतान करना पड़ रहा है।

 

सरकार ने निजी स्कूलों को खुद के भरोसे छोड़ दिया है। अब जब बाजार में सब कुछ सामान्य होने लगा है, तब स्कूल खोलने का भी निर्णय लेना चाहिए। कोई संचालक बंद स्कूल में किस प्रकार अपने खर्चे उठा सकता है। निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा कर फीस लेने का प्रयास किया था, लेकिन सरकार ने इस पर भी रोक लगवा दी। यदि स्कूल संचालक फीस नहीं लेंगे तो फिर बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।

 

निजी स्कूलों के माध्यम से लाखों लोग रोजगार पा रहे हैं, लेकिन इन दिनों सभी लोग बेरोजगार हो गए हैं। हो सकता है कि कुछ निजी स्कूल आर्थिक दृष्टि से समर्थ हो, लेकिन अधिकांश स्कूल संचालक बड़ी मुश्किल से अपने खर्चे निकाल पाते हैं। सरकार को ऐसा कोई रास्ता निकालना चाहिए जिससे निजी स्कूलों को राहत मिल सके। सरकार की अनदेखी की वजह से मौजूदा समय में निजी स्कूलों के संचालकों के सामने भूखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को संवेदनशील माना जाता है, लेकिन गहलोत ने अभी तक भी निजी स्कूलों के संचालकों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई है।

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