- अजमेर कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने कोरोना काल में सावधानी बरतने की अपील की।
- कोरोना वायरस की वजह से पुष्कर का प्रसिद्ध पशु मेला रद्द किया जा चुका है।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कोरोना वायरस का प्रकोप भले ही लगातार बढ़ रहा हो, लेकिन अजमेर में बाहर से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। दीपावली पर्व के बाद से ही जहां पुष्कर तीर्थ में श्रद्धालुओं की आवक बढ़ी तो वहीं अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जियारत के लिए आने वाले जायरीन की वजह से सम्पूर्ण दरगाह क्षेत्र में पैर रखने की जगह भी नहीं है। दरगाह के आसपास के होटल गेस्ट हाउस आदि सब फुल हैं। 
भले ही टे्रनों का संचालन कम हो रहा हो, लेकिन निजी वाहनों से जायरीन बड़ी संख्या में आ रहे हैं। जायरीन की भीड़ को देखते हुए प्रशासन काफी चिंतित हैं, क्योंकि अजमेर में भी कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। सर्दी के मौसम में मृतकों की संख्या भी बढ़ रही है। दरगाह क्षेत्र में लोगों को कोविड-19 के नियमों के प्रति जागरुक करने का अभियान भी चलाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पुष्कर का प्रसिद्ध पशु मेला पहले ही रद्द किया जा चुका है, लेकिन अब 25 नवम्बर से पुष्कर में पंचतीर्थ स्नान शुरू होने जा रहा है। यह पंचतीर्थ स्नान 29 नवम्बर तक चलेगा। यह पंचतीर्थ स्नान प्रतिवर्ष हिन्दू माह कार्तिक की एकादशी से पूर्णिमा तक होता है। इस बार कार्तिक माह की एकादशी 25 नवम्बर की है और पूर्णिमा 29 नवम्बर की यानि 25 से 29 नवम्बर तक श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करने के लिए आएंगे।
पंचतीर्थ स्नान का सनातन संस्कृति में विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्माजी ने पुष्कर में पांच दिनों तक यज्ञ किया था। इस यज्ञ में 20 करोड़ देवी देवता शामिल हुए। यज्ञ वाले स्थल पर ही आज पुष्कर सरोवर हैं। मान्यता है कि पंचतीर्थ स्नान के समय सभी देवी देवता पुष्कर में विराजमान होते हैं। मान्यता है कि एकादशी से पूर्णिमा तक पुष्कर सरोवर में स्नान करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इस मान्यता के चलते ही पुष्कर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। दीपावली के बाद से पुष्कर तीर्थ में भी श्रद्धालुओं की भी आवक बढ़ गई है।
सावधानी बरतने की अपील:
अजमेर के कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि पंचतीर्थ स्नान पर रोक लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप सभी धार्मिक स्थल खुले हुए हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरुरत है। चूंकि कोरोना वायरस एक दूसरे से मिलने जुलने से भी फैलता है, इसलिए लोगों को सार्वजनिक स्थलों में एकत्रित होने से बचना चाहिए।
जरूरी होने पर ही अपने घरों से निकलें। वरिष्ठ नागरिकों को तो ज्यादा सतर्कता बरतने की जरुरत है। सर्दी के मौसम में अन्य बीमारियों का असर भी बढ़ जाता है। कोरोना की गंभीर स्थिति को देखते हुए ही पुष्कर का पशु मेला रद्द किया गया है। चूंकि अब पुष्कर में पशुओं की खरीद फरोख्त नहीं होगी। इसलिए पशुपालक अपने पशुओं को नहीं लाएं। पुरोहितों ने कहा कि प्रशासन अपनी ओर से लोगों को कोविड-19 के नियमों के प्रति जागरुक कर रहा है, लेकिन लोगों को भी सावधानी बरतने की जरुरत है।







