- जम्मू के नगरोटा टोलप्लाजा पर खड़े ट्रक में राकेट लॉन्चर से हमला कर 4 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया।
- जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर लागू करने की कोई गुंजाइश नहीं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 19 नवम्बर की तड़के सुरक्षा बलों ने जम्मू के नगरोटा टोलप्लाजा पर खड़े एक ट्रक को राकेट लॉन्चर से उड़ा दिया। इस हमले में चार आतंकी ढेर हो गए। ये चारों आतंकी कश्मीर घाटी पहुंचकर पंचायतीराज चुनाव में दहशतगर्दी करना चाहते थे। ट्रक से 11 एके 47 राइफल हैंडग्रेनेड तथा भारी मात्रा में बारुद बरामद किया है। सुरक्षा बलों को ट्रक पर राकेट से हमला इसलिए करना पड़ा कि आतंकी ट्रक में छिप कर एके 47 से गोलियां दाग रहे थे। सुरक्षा बलों ने गोलियों का जवाब राकेट लान्चर से दिया।
सुरक्षा बलों के अनुसार इन चारों आतंकियों ने साबा सेक्टर से जम्मू में प्रवेश किया था। आतंकियों के प्रवेश और फिर जम्मू से कश्मीर जाने के बारे में पुलिस के पास पुख्ता सूचना थी, इसीलिए नगरोटा टोल प्लाजा पर ही ट्रक को घेर लिया गया। असल में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रभावी रहते पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ आसान थी, लेकिन अगस्त 2019 से 370 के हटने के बाद आतंकियों के सामने अनेक चुनौतियां खड़ी हो गई है। नजरबंदी से बाहर आने के बाद जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे अनुच्छेद 370 के वापसी हो। फारुख तो इसके लिए चीन से भी मदद लेने को तैयार है, जबकि महबूबा अपने प्रियदेश पाकिस्तान के भरोसे हैं।
पाकिस्तान को भी लगता है कि लोकतंत्र की आड़ में फारुख और महबूबा जो राजनीतिक सक्रियता दिखाएंगी उससे 370 की बहाली हो जाएगी। लेकिन अब पाकिस्तान को फारुख और महबूबा के उकसाने में नहीं आना चाहिए। यदि पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में आतंकियों को भेजेगा तो उनका वहीं अंजाम होगा जो 19 नवम्बर को नगरोटा टोल प्लाजा पर चार पाकिस्तानियों का हुआ है। यदि पाकिस्तानी आतंकी गोलियां चलाएंगे तो राकेट लॉन्चर से उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाएगा। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू कश्मीर की पुलिस भी ताकतवर हो गई है। फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के परिवारों के शासन में जम्मू कश्मीर पुलिस बेहद कमजोर हो गई थी। केन्द्रीय सुरक्षा बलों को तो जम्मू कश्मीर पुलिस पर भरोसा ही नहीं था। स्वभाविक है जिस सरकार को नेतृत्व अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार करेगा उस सरकार की पुलिस कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। असल में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार अनुच्छेद 370 की बहाली इसलिए चाहता है ताकि पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ आसान हो जाए।
पाकिस्तान को भी अब यह समझ लेना चाहिए कि कश्मीर में अब्दुल्ला और मुफ्ती के परिवारों का प्रभाव खत्म हो गया है। अब आतंकियों को भेजने से पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होने वाला। 19 नवम्बर को सुरक्षा बलों ने जब चार आतंकियों को ढेर किया तब जम्मू कश्मीर पुलिस का सिर्फ एक सिपाही घायल हुआ। अब आतंकियों से निपटने में सुरक्षा बलों ने भी अपनी रणनीति बदल ली है। आतंकियों की गोली का जवाब राकेट लॉन्चर से दिया जाता है। राकेट चलाने के लिए जवानों को आतंकियों के निकट भी नहीं जाना पड़ता। दूर से रोकेट दाग कर आतंकियों को ठिकाने लगाया जा सकता है। 19 नवम्बर के हमले के वीडियो को देखने से पता चलता है कि टोल प्लाजा पर कई ट्रकों के बीच में आतंकियों का भी ट्रक खड़ा था। सुरक्षा बलों ने निशाना साध कर आतंकियों के ट्रक पर ही राकेट गिराए।
पाकिस्तान को भारत की इस बदली रणनीति को भी समझना चाहिए। पाकिस्तान फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती माने या नहीं लेकिन अब कश्मीर के नागरिक भी हकीकत को समझ गए हैं। हमारे कश्मीर के नागरिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुसलमानों के हालात देख रहे हैं। पीओके में भुखमरी जैसे हालात हैं। जबकि भारत के कश्मीर में तो नागरिकों की हर इच्छा पूरी की जा रही है। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से सरकार की योजनाओं का लाभ भी कश्मीरियों को मिलने लगा है। अच्छा हो कि पाकिस्तान अपनी समस्याओं को निपटाए। पाकिस्तान को अब अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवारों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।







