कोरोना काल में केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए वेंटीलेटरों का समुचित और प्रभावी तरीके से उपयोग करे अजमेर प्रशासन।

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  • प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र केकड़ी के अस्पताल में भी समुचित उपयोग नहीं।
  • ज़रूरतमंद मरीजों को वेंटीलेटर नहीं मिलने पर भाजपा सांसद भागीरथ चौधरी ने जताई नाराजगी।
  • सरकार ने निजी अस्पतालों के 20 प्रतिशत वेंटीलेटर आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि केन्द्र सरकार ने कोरोना काल में अजमेर के लिए जो वेंटीलेटर दिए हैं, उनका प्रशासन द्वारा समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे जरुरतमंद मरीजों को परेशानी हो रही है। सांसद चौधरी ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा अजमेर प्रशासन को 74 वेंटीलेटर पलंग मिले हैं, प्रशासन ने 50 वेंटीलेटर अजमेर के जेएलएन अस्पताल को दिए हैं, जबकि 22 वेंटीलेटर चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र केकड़ी के सरकारी अस्पताल में उपलब्ध करवाए हैं।

 

 

इस प्रकार 15 वेंटीलेटर किशनगढ़ के यज्ञनारायण अस्पताल में दिए हैं। चूंकि केकड़ी और किशनगढ़ के सरकारी अस्पतालों में तकनीकी स्टाफ की कमी है इसलिए केकड़ी से 15 और किशनगढ़ से 7 वेंटीलेटर वापस अजमेर के जेएलएन अस्पताल में आ गए हैं। आमतौर पर यह शिकायत है कि कोरोना संक्रमित अथवा सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को मांग के अनुरूप वेंटीलेटर की सुविधा नहीं मिलती है। इससे मरीज परेशान होते हैं। सांसद चौधरी ने कहा कि अजमेर के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त संख्या में वेंटीलेटर हैं, लेकिन इनका समुचित और प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि मरीजों को जरुरत के अनुरूप वेंटीलेटर उपलब्ध करवाएए जाएं। यदि और वेंटीलेटर की जरुरत होगी तो वे केन्द्र सरकार से उपलब्ध करवाएंगे। चौधरी ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए प्रशासन को सरकारी अस्पतालों में समुचित व्यवस्थाएं करनी चाहिए। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

 

निजी अस्पतालों में 20 प्रतिशत वेंटीलेटर आरक्षित:
राज्य सरकार के निर्देश पर अजमेर प्रशासन ने निजी अस्पतालों के प्रबंधकों को 20 प्रतिशत वेंटीलेटर आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। कोरोना काल में निजी अस्पतालों में भी वेंटीलेटरों की मांग बढ़ी है। कोरोना के अलावा अन्य रोगों के मरीजों को भी वेंटीलेटर की जरुरत होती है। ऐसे में यदि 20 प्रतिशत वेंटीलेटर आरक्षित हो जाएंगे तो निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का क्या होगा? एक ओार सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर का प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है तो दूसरी ओर निजी अस्पतालों के वेंटीलेटर आरक्षित किए जा रहे हैं। आरक्षित रखने का मतलब है कि निजी अस्पताल के प्रबंधक अपने 20 प्रतिशत वेंटीलेटर का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

 

यदि किसी निजी अस्पताल में 50 वेंटीलेटर है तो उसे 10 वेंटीलेटर को हर समय खाली रखना होगा। यह माना कि कोरोना के संक्रमण को देखते हुए किसी भी वक्त वेंटीलेटर की जरुरत हो सकती है, लेकिन निजी अस्पतालों के वेंटीलेटर आरक्षित करने से पहले सरकारी अस्पतालों में रखे वेंटीलेटरों का तो समुचित और प्रभावी उपयोग हो। असल में सरकारी अस्पतालों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए निजी अस्पतालों पर जिम्मेदारी को थौप दिया है। जानकार सूत्रो के अनुसार अकेले अजमेर के जेएलएन अस्पताल में मौजूदा समय में भी 80 वेंटीलेटर खाली पड़े हैं। 120 में से 40 का ही उपयोग हो रहा है।

 

सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े वेंटीलेटरों को लेकर तो कोई कार्यवाही नहीं होगी, लेकिन आकस्मिक चैकिंग के दौरान निजी अस्पताल में 20 प्रतिशत वेंटीलेटर खाली नहीं मिले तो प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही हो जाएगी। सरकार को निजी अस्पतालों के वेंटीलेटर आरक्षित करने का पूरा अधिकार है, लेकिन अच्छा हो कि सरकार स्थायी तौर पर आरक्षित करने के बजाए कुछ घंटे पहले सूचना देकर वेंटीलेटरों का उपयोग कर ले। प्रशासन के ताजा आदेश से अब अजमेर के निजी अस्पतालों में भर्ती अनेक मरीजों को जयपुर या अन्य किसी बड़े शहर में इलाज के लिए जाना पड़ेगा।

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