प्रति पक्ष के नेता का पद बचाए रखने के लिए कटारिया ने दिया कांग्रेस सरकार गिराने वाला बयान।

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  • हम इशारा करते तो दो नगर निगम में भी भाजपा के मेयर नहीं बनते।
  • चुनाव आयोग के निर्देश मिलते ही राजस्थान में रीट परीक्षा की तिथि घोषित हो जाएगी।
  • शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि निजी स्कूलों के संचालकों को धरना अनशन छोड़कर काम धंधा करना चाहिए।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की जयंती पर 19 नवम्बर को जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में पुष्पांजलि कार्यक्रम रखा गया। इंदिरा गांधी के चित्र पर पुष्पअर्पित करने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया से संवाद किया और पत्रकारों के सवालों के जवाब बेबाकी के साथ दिए। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार छह माह में गिर जाएगी वाले गुलाब चंद कटारिया के बयान पर डोटासरा ने कहा कि कटारिया विधानसभा में प्रति पक्ष के नेता है। मुझे जानकारी मिली है कि कटारिया का प्रति पक्ष के नेता का पद खतरे में है।

 

 

कटारिया ने अपने पद को बचाए रखने के लिए सरकार गिराने वाला बयान दिया है। यह बयान दिल्ली में बैठे भाजपा के नेताओ के इशारे पर दिया गया है। लेकिन भाजपा कितना भी जोर लगा लें, पर गहलोत सरकार नहीं गिरेगी। निर्वाचित सरकारें गिराने का काम भाजपा का है। डोटासरा ने कहा कि यदि हम इशारा कर देते तो जोधपुर और जयुपर में एक एक निगम में भाजपा का मेयर भी नहीं बनता। कांग्रेस लोकतंत्र में विश्वास रखती है। कांग्रेस पार्टी भाजपा की मनोवृत्ति वाली पार्टी नहीं है, इसलिए हमने 6 में से दो नगर निगम में भाजपा के मेयर बनने में कोई रुकावट नहीं डाली।

 

चुनाव आयोग में अटकी है फाइल:
डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) करने के लिए सरकार इच्छुक है। लेकिन फाइल अभी चुनाव आयोग के पास अटकी हुई है। पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनाव के मद्देनजर रीट परीखा करवाने के लिए आयोग से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही रीट परीक्षा की तिथि घोषित कर दी जाएगी। डोटासरा ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है, उम्मीद है कि प्रदेश के लाखों युवाओं की स्थिति को देखते हुए जल्द अनुमति मिल जाएगी। जयपुर में चल रहे निजी स्कूलों के संचालकों के प्रदेशव्यापी धरना अनशन के संबंध में डोटासरा ने कहा कि सरकार ने अपनी मर्जी से स्कूलें बंद नहीं की है।

 

कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्कूलों को बंद किया गया है। जिन राज्यों में स्कूलें खोली वहां फिर से बंद करनी पड़ी है। अभिभावकों की यह बात जायज है कि जब स्कूल बंद है और पढ़ाई हुई ही नहीं है तो फिर फीस क्यों दी जाए। डोटासरा ने कहा कि निजी स्कूलों के संचालकों की यदि कोई मांग वाजिब होगी तो उस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। स्कूल संचालकों को धरना अनशन छोड़कर अपना काम धंधा करना चाहिए। काम धंधा शब्द पर जोर देते हुए डोटासरा ने कहा कि उनकी तो बोली ही ऐसी है। यहां उल्लेखनीय है कि निजी स्कूलों के संचालकों के लिए धंधे शब्द का इस्तेमाल करने को लेकर शिक्षा मंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई है।

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