जयपूर (एस.पी.मित्तल) – इसे राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र का अजूबा ही कहा जाएगा कि जो आदेश चार माह पहले निकलना था वो आदेश समस्या के समाप्त होने के बाद निकला है। अजमेर के संभागीय आयुक्त के पद पर जब लक्ष्मीनारायण मीणा विराजमान थे, तब अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त गौरव अग्रवाल ने सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा कि प्राधिकरण के अध्यक्ष का चार्ज संभागीय अयुक्त से लेकर अजमेर के जिला कलेक्टर को सौंप दिया जाए।
इसके पीछे अग्रवाल का तर्क रहा कि लक्ष्मीनारायण मीणा अपनी सेवा निवृत्ति को देखते हुए प्राधिकरण की फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। इससे प्राधिकरण का काम काज प्रभावित हो रहा है। अग्रवाल के इस प्रस्ताव का मीणा ने भी बुरा नहीं माना, क्योंकि वे फाइल पर हस्ताक्षर कर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। चूंकि प्राधिकरण में अध्यक्ष की राजनीतिक नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए संभागीय आयुक्त को ही अध्यक्ष का चार्ज दे रखा है।
अग्रवाल को उम्मीद थी कि सरकार में उनके प्रस्ताव पर तत्काल अमल हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गत 31 मई को लक्ष्मीनारायण मीणा संभागीय आयुक्त के पद से रिटायर भी हो गए, लेकिन कलेक्टर को चार्ज देने वाला आदेश सरकार से निकला। अब जब गौरव अग्रवाल प्राधिकरण को छोड़कर टोंक के कलेक्टर बन गए हैं और संभागीय आयुक्त के पद पर आरुषि मलिक की नियुक्ति हो गई है, तब 5 जुलाई को सरकार ने प्राधिकरण के अध्यक्ष का चार्ज अजमेर कलेक्टर को देने के आदेश जारी किए हैं। जबकि जिस मकसद से गौरव अग्रवाल ने प्रस्ताव किया था, वह मकसद अब समाप्त हो गया। पहले तो सरकार ने चार माह बाद आदेश जारी किया और फिर आदेश निकालते समय मौजूदा हालातों का जायजा नहीं लिया। इससे प्रतीत होता है कि प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में अनेक खामियां हैं। अब जब आरुषि मलिक संभागीय आयुक्त का पद संभालने जा रही हैं, तब प्राधिकरण के अध्यक्ष का चार्ज कलेक्टर को देने के क्या मायने हैं? खास बात तो यह है कि अजमेर कलेक्टर भी बदल चुके हैं। गौरव अग्रवाल ने जब प्रस्ताव किया था, तब विश्वमोहन शर्मा अजमेर के कलेक्टर हैं, जबकि अब प्रकाश राजपुरोहित ने कलेक्टर का पद भार संभाल लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत 28 जून को संबंधित मंत्री ने फाइल पर हस्ताक्षर किए। यानि जो प्रस्ताव चार माह पहले किया गया, उस पर मंत्री के हस्ताक्षर 28 जून को हुए। मंत्री ने भी फाइल पर हस्ताक्षर करते समय अपना दिमाग नहीं लगाया।
प्राधिकरण की हालत खराब:
चूंकि पिछले एक वर्ष से प्राधिकरण में आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण फैसले नहीं हुए, इसलिए प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। सूत्रों की माने तो कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी हो सकती है। प्राधिकरण की स्वयं की आवासीय कॉलोनी में भी विकास कार्य पड़े हैं। हालांकि सरकार ने अब आयुक्त के पद पर अजमेर की ही रहने वाली आईएएस सुश्री रेणु जयपाल की नियुक्ति कर दी है। जयपाल भी आयुक्त का पद संभाल रही है। उम्मीद है कि अब प्राधिकरण के काम काज को गति मिलेगी।
मलिक संभालेंगी डीसी का पद।
वरिष्ठ आईएएस आरुषि मलिक 9 जुलाई को अजमेर के संभागीय आयुक्त का पद संभालेंगी। मलिक पंचायतीराज विभाग के विशिष्ट शासन सचिव के पद से स्थानांतरित होकर आ रही हैं। मलिक पूर्व में अजमेर की जिला कलेक्टर भी रह चुकी हैं।







