फीस जमा करवाना अभिभावकों की मजबूरी हैं; क्योंकि प्राइवेट स्कूलों के संचालक सरकार के आदेशों की परवाह नहीं करते है।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कोरोना काल में जब सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद पड़े हैं, तब अभिभावकों की परेशानी को देखते हुए राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने 7 जुलाई को एक आदेश जारी कर स्कूलों की फीस को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। यानि अब प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों से भी फीस नहीं ली जा सकेगी।
कायदे से सरकार के इस आदेश को सभी स्कूल संचालकों को मानना है, लेकिन सरकार के इस आदेश की अहमियत का अंदाजा अजमेर की मयूर पब्लिक स्कूल की सूचना से लगाया जा सकता है। स्कूल की ओर से सभी अभिभावकों को मोबाइल पर मैसेज दिया है कि जुलाई से लेकर सितम्बर माह तक फीस 31 जुलाई तक जमा करवा दी जाए। यहां यह उल्लेखनीय है कि मयूर स्कूल के संचालकों ने जनवरी माह में ही आगामी 6 माह की फीस एक साथ वसूल ली थी। यानि मयूर के पास 30 जून 2020 तक की फीस जमा है और अब आगामी तीन माह की फीस के लिए सूचना दे दी गई है। ऐसा प्रदेश के अधिकांश प्राइवेट स्कूल वाले करते है।
अभिभावकों को भी पता है कि सरकार के आदेशों की प्राइवेट स्कूल संचालकों के सामने कोई अहमियत नहीं होती है। सरकार में बैठे मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के बच्चे मयूर जैसी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। सरकार के आदेश गली कूचों में चलनी वाली प्राइवेट स्कूलों पर ही लागू हो सकते हैं। ऐसे स्कूल पहले ही बंद होने के कगार पर है। मयूर जैसी बड़ी स्कूलों पर कार्यवाही करने की हिम्मत किसी भी दल की सरकार में नहीं है। ऐसी स्कूलों के सामने सरकार नतमस्तक है। यही वजह है कि मोबाइल पर सूचना मिलने के साथ ही मयूर स्कूल में फीस जमा करवाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
एक अभिभावक को तीन माह की कम से कम तीस हजार रुपए फीस जमा करवानी होगी। स्कूल का कहना है कि विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है, इसलिए वे फीस के हकदार हैं। ऑनलाइन पढ़ाई किस तरह हो रही है, इसकी हकीकत सभी अभिभावक जानते हैं। सवाल तो सरकार के डर का है जो मयूर जैसी प्राइवेट स्कूलों में नजर नहीं आता। सरकार कितने भी आदेश निकाल लें, लेकिन प्राइवेट स्कूल वाले तो वर्ष भर की फीस वसूलेंगे ही।

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