आखिर 50 में से 36 निकायों पर कांग्रेस का कब्ज़ा करवा ही दिया। पंचायत चुनाव की हार का हिसाब बराकर किया।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) – किसी प्राइवेट स्कूल के मालिक का बेटा अपनी ही स्कूल में आठवीं कक्षा की परीक्षा दे और परिणाम आने से पहले ही सार्वजनिक घोषणा कर दे कि उसे 100 अंकों में 90 अंक प्राप्त होंगे, तो ऐसे विद्यार्थी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ राजस्थान में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने किया है।
राजस्थान में 50 स्थानीय निकायों के चुनाव हुए। 4 दिसम्बर को जब वार्ड पार्षदों के परिणाम घोषित हुए तो कांग्रेस को सिर्फ 14 निकायों में बहुमत मिला, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने सार्वजनिक घोषणा की कि 40 निकायों में कांग्रेस अपना प्रमुख बनाएगी। डोटासरा ऐसा दावा इसलिए कर सके क्योंकि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार चल रही है। जिस पार्टी की सरकार होती है उसे जोड़ तोड़ करने में फायदा होता ही है। 50 निकायों में से 32 में कांग्रेस और भाजपा दोनों को बहुमत नहीं मिला था, इसलिए सत्तारुढ़ पार्टी ने 36 निकायों में अपना प्रमुख बनवाने में सफल हुई। यानि डोटासरा ने जो वायदा किया उस पर वे खरे उतरे हैं।
चार माह पहले सचिन पायलट को हटा कर प्रदेशाध्यक्ष बने डोटासरा अब सीना ठोक कर कह सकते हैं कि निकाय चुनाव में भाजपा को मात दे दी है। भाजपा मात्र 12 निकायों में भी अपना प्रमुख बनवाने में सफल हुई है। कांग्रेस को पार्षद चुनाव में भले 36 निकायों में बहुमत नहीं मिला हो, लेकिन 36 निकायों में प्रमुख बनवा कर झंडा बुलंद कर दिया है। वर्ष 2015 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, तब इन्हीं 50 निकायों में से भाजपा ने 34 पर कब्ज़ा जमाया था। भाजपा को इस बार सिर्फ 14 निकायों में ही संतोष करना पड़ा है।
हाल ही में सम्पन्न हुए पंचायतीराज के चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। कांग्रेस की आंतरिक खींचतान में निकाय चुनाव में सीएम अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी राहत प्रदान करेंगे। अब गहलोत के समर्थक कह सकते हैं कि सचिन पायलट के बगैर भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत हुई है। निगम प्रमुख के परिणामों से डोटासरा तो बेहद उत्साहित हैं। मालूम हो कि प्रदेश में फरवरी माह में करीब 90 स्थानीय निकायों में चुनाव होंगे। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने तैयारियाँ शुरू कर दी है।







