- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को लगता है कि सोवियत संघ की तरह भारत भी विभाजित हो जाएगा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – शिवसेना के मुख्य पत्र सामना में 27 दिसम्बर को संपादकीय प्रकाशित हुआ है। इस संपादकीय में आशंका जताई गई है कि सोवियत संघ की तरह भारत भी विभाजित हो जाएगा। शिवसेना का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जो नीतियां अपनाई है, उनसे देश को खतरा हो गया है। शिवसेना के कथन से सवाल उठता है कि जो लोग भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाते है उनमें और शिवसेना में क्या फर्क है? क्या दोनों की सोच एक जैसी नहीं है?
सब जानते हैं कि सामना अखबार का प्रकाश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के परिवार द्वारा किया जाता है। सामना में जो छपता है उसे ही शिवसेना और ठाकरे परिवार के विचार माने जाते हैं। इसलिए अखबार का संपादक भी ठाकरे परिवार के भरोसेमंद व्यक्ति को बनाया जाता है। इस समय अखबार का संपादक की भूमिका संजय राउत के पास है। ठाकरे परिवार के प्रति वफादारी के कारण ही संजय राउत को राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया है। संजय राउत ही शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता हैं। सामना में प्रकाशित संपादकीय का महत्व इसलिए भी है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी हैं। यदि मुख्यमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति भी भारत के विभाजित होने की सोच रखता है तो फिर देश के लोकतंत्र का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गंभीर बात यह है कि दो दिन गुजर जाने के बाद भी सीएम उद्धव ठाकरे ने अपने अखबार के संपादकीय पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे प्रतीत होता है कि वे अखबार में छपे संपादकीय से सहमत हैं। यह माना कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के सहयोग से शिवसेना की सरकार चला रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने की जिद को पूरा करने के लिए ही उद्धव ठाकरे ने भाजपा का साथ छोड़ा था। कांग्रेस और एनसीपी की मदद से उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन ऐसी सोच की उम्मीद किसी ने भी नहीं की थी।
शिवसेना की बदली सोच पर भी महाराष्ट्र के लोगों खासकर शिवाजी को मानने वाले मराठियों को भी आश्चर्य हो रहा है। शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के विचार किसी से भी छिपे नहीं है। मुंबई में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच का विरोध बाला साहब अपने जीवन में करते रहे। कई बार वानखेड़े स्टेडियम का पिच बर्बाद कर दिया। जब अयोध्या में विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई, तब बाला साहब ने ही सीना तान कर कहा था कि ढांचे को शिव सैनिकों ने गिराया है। देश की एकता और अखंडता के लिए बाला साहब सदैव देश की जनता के साथ खड़े रहते थे। यह बात अलग है कि अब उसी शिवसेना का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं।







