राजनीति में नंगे हुए शिवसेना के सांसद संजय राउत को अब 121 भाजपा नेताओं की लिस्ट जारी करनी चाहिए।

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  • संजय राउत का परिवार यदि ईमानदार है तो मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के समक्ष उपस्थित क्यों नहीं होता?

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 29 दिसम्बर को भी शिवसेना के सांसद संजय राउत की पत्नी मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के समक्ष उपस्थित नहीं हुई। यह तीसरा अवसर है जब श्रीमती राउत उपस्थित नहीं हुई है। संजय राउत ने कहा कि ईडी के अधिकारियों से एक सप्ताह का समय मांगा है। श्रीमती राउत पर मुंबई के पीएमसी बैंक घोटाले में फंसे एक व्यक्ति से 55 लाख रुपए लेने का आरोप है। इस सिलसिले में ईडी के अधिकारी श्रीमती राउत से पूछताछ करना चाहते हैं।

यह एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन संजय राउत का आरोप है कि केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाला प्रवर्तन निदेशालय राजनीतिक कारणों से जांच कर रहा है। स्वयं को राजनीति का नंगा आदमी बताते हुए संजय राउत ने कहा कि यदि उनसे पंगा (झगड़ा) मोल लिया गया तो वे भाजपा के 121 नेताओं की सूची ईडी को सौंप देंगे। जांच होने पर भाजपा के ऐसे नेताओं को देश छोड़कर भागना पड़ेगा। संजय राउत राजनीतिक के नंगे आदमी है या नहीं, यह संजय राउत का परिवार और शिवसेना वाले जाने, लेकिन ईडी ने तो संजय राउत से पंगा ले ही लिया है।

उनकी पत्नी को तीन बार नोटिस जारी कर दिए हैं। यह बात अलग है कि श्रीमती राउत ईडी कार्यालय में उपस्थित नहीं हो रही है। जब उपस्थित होंगी तो जांच भी आगे बढ़ेगी। संजय राउत अब और कितना इंतजार करेंगे। यदि 121 बेईमान भाजपा नेताओं की सूची संजय राउत जरी करेंगे तो इससे राजनीति में स्वच्छता ही आएगी। यदि भाजपा नेताओं ने वित्तीय अनियमितता की है तो उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए। यदि अब संजय राउत भाजपा नेताओं की सूची जारी नहीं करते हैं तो फिर उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

एक तरफ कहा जा रहा है कि भाजपा नेता महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली उद्धव सरकार को गिराने की साजिश कर रहे हैं और दूसरी ओर संजय राउत तथाकथित तौर पर बेईमान भाजपा नेताओं की सूची छिपाएं बैठे हैं। आखिर सूची जारी करने के लिए संजय राउत किसका इंतजार कर रहे हैं? या फिर 121 भाजपा नेताओं की बात कह कर डराने की कोशिश की गई है। संजय राउत यह भी दावा करते हैं कि महाराष्ट्र की गठबंधन की सरकार उन्हीं के भरोसे चल रही है। सरकार गिराने के लिए भाजपा का दबाव था, लेकिन मैंने भाजपा की बात नहीं मानी, इसलिए ईडी से नोटिस दिलवाया गया है। सवाल उठता है कि जब संजय राउत ही सरकार बचाए हुए हैं तो शरद पवार जैसे दिग्गज नेता क्या कर रहे हैं?

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