जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के पास यदि 25 विधायकों का जुगाड़ होगा तो अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी। ऐसे में गहलोत सीएम की हैसियत से एसओजी से जांच कराएं या फिर एसीबी को आगे करें। इन जांच एजेंसियों के अधिकारी सरकार के इशारों पर ही काम करते हैं।
यदि पायलट के पास 25 विधायक का जुगाड़ नहीं है तो फिर भाजपा कितना भी जोर लगा ले, गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार को कोई नहीं गिरा सकता। इसलिए राजस्थान की राजनीति में पायलट की ही भूमिका के मायने हैं। हालांकि गहलोत सीएम बनने के बाद से कम से कम 100 बार पायलट कह चुके हैं कि वे अपनी पार्टी की सरकार को नहीं गिराएंगे, लेकिन हर बार गहलोत को लगता है कि भाजपा ने जिस प्रकार मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोग से कांग्रेस की सरकार गिराई, वैसी ही राजस्थान में मेरी सरकार गिराने के प्रयास हो रहे हैं।
गहलोत भले ही पायलट का नाम न लें, लेकिन इशारा पायलट की ओर ही जाता है। जब राजस्थान में मध्यप्रदेश की तरह सरकार गिराने की बात होगी तो सबसे पहले ज्योतिरादित्य की तलाश होगी। राजस्थान में ज्योतिरादित्य की भूमिका में कौन है यह अशोक गहलोत अच्छी तरह जानते हैं। ताजा राजनीतिक विवाद में उदयपुर के अशोक सिंह चौहान और ब्यावर के भरत मालानी के बीच मोबाइल पर हुई बात को आधार बनाया जा रहा है। यह सही है कि चौहान और मालानी दोनों भाजपा के कार्यकर्ता हैं, लेकिन सवाल उठता है कि दो कार्यकर्ताओं के बीच हुई वार्ता से क्या अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार गिर जाएगी? क्या सचिन पायलट जैसा दिग्गज नेता दो साधारण कार्यकर्ता के बल पर भाजपा से साठ-गांठ की बात करेगा? राज्यसभा चुनाव के समय से ही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के अधिकारी विधायकों की खरीद फरोख्त की जांच कर रहे है।
अब एसओजी का कहना है कि अशोक सिंह चौहान और भरत मालानी के बीच हुई वार्ता का टेप उनके पास है। इसमें गहलोत की सरकार गिराने की बात हो रही है। यह भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट स्वयं मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जबकि भाजपा वाले पायलट को केन्द्र में मंत्री बनाने के पक्ष में है। यानि ये दोनों भाजपा के कार्यकर्ता पायलट की भूमिका पर विचार कर रहे हैं। अब इस टेप को आधार बना कर ही भाजपा को घेरने की कोशिश की जा रही है। अपने कार्यकर्ताओं की वार्ता पर भाजपा के बड़े नेता जवाब देंगे, लेकिन सरकार के इशारे पर काम करने वाले एसओजी के अधिकारी बताएं कि जो सचिन पायलट सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष होने के साथ सरकार के डिप्टी सीएम भी हैं वो क्या इन छुटभैय्या नेताओं के जरिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह जेपी नड्डा जैसों से बात करेंगे? जाहिर है कि अशोक गहलोत के निशाने पर भाजपा से ज्यादा अपनी पार्टी के नेता हैं। ऐसे नेताओं को गहलोत इतना कमजोर कर देना चाहते हैं ताकि भविष्य में चुनौती नहीं दी जा सके। अभी राजस्थान की राजनीति में वो ही हो रहा है जो गहलोत चाहते है।
मजबूत स्थिति में है गहलोत सरकार:
मौजूदा समय में राजस्थान में गहलोत सरकार मजबूत स्थिति में है। 200 विधायकों मे से कांग्रेस के अपने 107 विधायक है। जबकि 13 निर्दलीय, 2 सीपीएम, 2 टीडीपी के विधायकों का भी समर्थन है। भाजपा के अपने 72 तथा 3 आरएलपी के विधायक हैं। यानि गहलोत सरकार को 125 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में सरकार गिराने के लिए कम से कम 25 विधायक चाहिए। मौजूदा समय में 25 विधायकों को अशोक गहलोत से छीनना आसान नहीं है। देखना है कि कांग्रेस की यह आंतरिक लड़ाई किस सीमा तक जाती है।
चौहान और मालानी:
भरत मालानी अजमेर जिले के ब्यावर उपखंड के कारोबारी है, इसलिए भाजपा के उद्योग प्रकोष्ठ से जुड़े रहे हैं। मालानी विधानसभा चुनाव में ब्यावर और मसूदा से अपनी दावेदारी भी जता चुके हैं। भीलवाड़ा के भाजपा सांसद सुभाष बहेडिया से स्वजाति का होने के कारण मित्रता है। लेकिन मालानी अजमेर में भाजपा की जिला कार्यकारिणी के सदस्य भी नहीं रहे। मालानी की पाटी्र में एप्रोच भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष देवीशंकर भूतड़ा तक है। मालानी भाजपा के ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत से सीधे बात करने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में कांग्रेस के विधायक तोडऩे में मालानी की क्या भूमिका होगी, यह एसओजी के अधिकारी ही बता सकते हैं। अजमेर जिले से कांग्रेस के दो विधायक हैं। एक केकड़ी के रघु शर्मा जो गहलोत सरकार में ताकतवर चिकित्सा मंत्री है। जबकि दूसरे मसूदा के राकेश पारीक। सब जानते हैं कि पारीक सचिन पायलट के साथ ही जाएंगे। क्या राज्यसभा चुनाव के दौरान ब्यावर के भरत मालानी ने अपने जिले के कांग्रेसी विधायक राकेश पारीक से बात की थी? इसका जवाब भी एसओजी ही दे सकती है क्योंकि मालानी को मोबाइल (8949065678) भी एसओजी के पास ही सर्विलांश पर था। इसी प्रकार उदयपुर के भाजपा कार्यकर्ता अशोक चौहान भी पूर्व में प्रदेश कार्य समिति के सदस्य रहे हैं। राजपूत समाज की प्रतिनिधि संस्था क्षत्रिय महासभा से जुड़े होने के कारण चौहान का खनन का भी कारोबार है। उदयपुर वैसे भी भाजपा का गढ़ है। एसओजी ने चौहान का मोबाइल नम्बर 9929229909 भी सर्विलांस पर रखा है। फिलहाल एसओजी ने चौहान और मालानी के बीच की वार्ता को मीडिया में प्रसारित करवाया है। हो सकता है कि अगले कुछ दिनों में चौहान और मालानी की भाजपा नेताओं के साथ हुई वार्ता भी लीक की जाए। फिलहाल एसओजी ने चौहान और मालानी को गिरफ्तार कर लिया है। इन दोनों की गिरफ्तारी अब विधायकों की खरीद फरोख्त का मामला और रौचक हो गया है।







