- अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मुहिम जारी रखेंगे।
- साथी विधायकों को विधायक पद नहीं छिने का भरोसा दिलाया।
- गहलोत कैम्प में मौजूद विधायकों पर पायलट को अभी भी भरोसा।
- बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी। गहलोत सरकार अल्पमत में है-सतीश पूनिया
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 15 जुलाई को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे ने ट्वीट कर कहा कि सचिन पायलट के लिए पार्टी के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। उनकी भगवान से प्रार्थना है कि पायलट अपनी गलती को समझे और भाजपा के मायावी जाल से बाहर निकले। इस ट्वीट के बाद मीडिया में खबरें आई कि पायलट को कांग्रेस में वापस आने का एक और मौका दिया गया है, लेकिन जानकार सूत्रों के अनुसार पायलट ने पांडे का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया है। पायलट का कहना है कि जब प्रदेशाध्यक्ष और मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया है, तब पांडे का ऐसा प्रस्ताव कोई मायने नहीं रखता है। वैसे भी पायलट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक से मिलने से इंकार कर दिया था। पायलट भाजपा में जाएं या नहीं, लेकिन उन्हें पता है कि कांग्रेस में पहले जैसा सम्मान नहीं होगा। यदि मौजूदा हालात में पायलट कांग्रेस में जाते हैं तो यह माना जाएगा कि वे डर गए हैं। पायलट अब गिड़गिड़ाते हुए कांग्रेस में जाने के इच्छुक नहीं है। पायलट कैम्प से प्राप्त खबरों के अनुसार पायलट अब अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। पायलट ने 15 जुलाई को अपने समर्थक 18 विधायकों को भरोसा दिलाया है कि किसी विधायक का पद नहीं छिनेगा। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने जो नोटिस दिया है, उसे कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। इस बीच विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने भी कहा कि किसी राजनीतिक दल की बैठक में विधायकों की उपस्थिति जानने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को नहीं है। विधानसभा सत्र के दौरान ही व्हिप जारी होने पर अध्यक्ष अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कटारिया ने बयान को भी आगे रख कर पायलट समर्थक विधायकों की हिम्मत बढ़ाई है। सूत्रों की माने तो सभी 18 विधायकों ने पायलट के नेतृत्व में भरोसा जताया है और कहा है कि मौजूदा हालात में घबराने की जरुरत नहीं है। कई विधायक तो पायलट के खातिर अपनी विधायकी भी दांव पर लगाने को तैयार है। इस बीच पायलट समर्थक विधायक विश्वेन्द्र सिंह ने कहा है कि जयपुर की होटल फेयरमाउंट में जो विधायक उपस्थित हैं उनसे अशोक गहलोत ने मोबाइल तक छीन लिया है। यदि गहलोत को कोई डर नहीं है तो फिर विधायकों पर इतनी पाबंदियां क्यों लगा रखी है। विश्वेन्द्र सिंह ने दावा किया कि गहलोत कैम्प में मौजूदअनेक विधायक पायलट के साथ है। मौका आने पर असलियत का पता चल जाएगा।
अल्पमत में है गहलोत सरकार -पूनिया:
इस बीच भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने चौंकाने वाला बयान दिया है। पूनिया ने कहा कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बकरे की मां, कब तक खैर मनाएगी? पूनिया ने स्पष्ट कहा कि हमारा मकसद गहलोत की सरकार को गिराना है, क्योंकि इस सरकार कीवजह से राजस्थान की जनता त्रस्त है। कोरोना काल में सरकार पूरीतरह विफल रही है। जहां तक पायलट का भाजपा में शामिल होने का सवाल है तो प्रदेश भाजपा कोई ऐतराज नहीं है। यदि राष्ट्रीय नेतृत्व पायलट को भाजपा में शामिल करेगा तो हम स्वागत करेंगे। पूनिया ने कहा कि पायलट की नाराजगी का ठीकरा अशोक गहलोते भाजपा पर फोड़ रहे हैं, जबकि पायलट ने साफ कर दिया कि गहलोत के इशारे पर उन्हे अपमानित किया जा रहा था। अपमान जब सिर पर से गुजर गया, तब पायलट ने बगावत की है। यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है। पायलट का यह कहना सही है कि चुनाव में जो वायदे किए थे,उन्हें सरकार बनने पर पूरा नहीं किया है7 यही बात भाजपा लगातार कह रही है।







