ब्लॉग संख्या 6875 में 12 जून को जो लिखा, उसकी पुष्टि 20 जुलाई को सीएम अशोक गहलोत ने की।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – वाकई कांग्रेस भी बड़े दिल वाली राजनीतिक पार्टी है। अब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर पिछले सात वर्षों से सचिन पायलट के तौर पर गद्दार, धोखेबाज, निकम्मा और नकारा अवगुणों वाला नेता बैठा हुआ था। मुझे सब पता है कि यह नकारा किस्म का पायलट क्या कर रहा है, लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी के स्नेह की वजह से सचिन पायलट को अध्यक्ष पद से नहीं हटाया गया। सीएम गहलोत ऐसी बातें तब से कह रहे हैं, जब से सचिन पायलट कांग्रेस के 18 विधायकों को लेकर दिल्ली चले गए हैं। गहलोत को लगता है कि पायलट की वजह से अब उनकी सरकार अल्पमत में आ गई है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पायलट के मुकाबले गहलोत एक मजे हुए राजनीतिज्ञ हैं। पायलट की जितनी उम्र होगी, उससे ज्यादा वर्षों से गहलोत कांग्रेस में अपनी रगड़ाई करवा रहे हैं। लेकिन गहलोत जैसे नेता के रहते हुए गद्दार, धोखेबाज निकम्मा और नकारा अवगुणों वाला कोई कांग्रेसी सात वर्षों तक राजस्थान में पार्टी का अध्यक्ष रह जाए, यह महत्वपूर्ण बात है। 18 विधायकों के जयपुर से टेकऑफ हो जाने वाले जहाज के पायलट में सारे अवगुण नजर आ रहे हैं,ं लेकिन इन सात वर्षों में ऐसे कई मौके आए, जब गहलोत ने ही सचिन पायलट को कुशल, मेहनती, वफादार और सफल प्रदेशाध्यक्ष बताया। पायलट को युवाओं का जोश बतानेमें भी कोई कसर नहीं छोड़ी गई। राजस्थान में कांग्रेस को दोबारा से सत्ता में लाने के पायलट के दावे को भी गहलोत खारिज कर रहे हैं। गहलोत का स्पष्ट कहना है कि पायलट खुद ही श्रेय ले रहे हैं, जबकि मुझे पता है कि कांग्रेस दोबारा से कैसे सत्ता में आई है। गहलोत भले ही पायलट को कांग्रेस की जीत का श्रेय नहीं दें, लेकिन सब जानते हैं कि वर्ष 2018 में सम्पन्न हुए विधानसभा के चुनाव में भाजपा का एक भी गुर्जर उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका था। भाजपा के सभी गुर्जर उम्मीदवार क्यों हारे, इस सच्चाई को भी गहलोत अच्छी तरह जानते हैं। यह बात अलग है कि सचिन पायलट और उनके पिता स्वर्गीय राजेश पायलट की फोटो लगाकर चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के कई गुर्जर विधायक अब गहलोत के साथ खड़े होकर पायलट को ही गद्दार धोखेबाज नकारा और निकम्मा मान रहे हैं। राजस्थान की राजनीति किस ओर जाएगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल वो ही हो रहा है जो अशोक गहलोत चाह रहे हैं। कांग्रेस की ओर से हर मोर्चे पर गहलोत ही खड़े नजर आ रहे हैं।
ब्लॉग में लिखे की पुष्टि:
12 जून 2020 को मैंने ब्लॉग संख्या 6875 सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न प्लेटफार्मों पर पोस्ट किया। इस ब्लॉग में लिखा था कि 11 जून को दौसा में स्वर्गीय राजेश पायलट की पुण्यतिथि के श्रद्धांजलि समारोह में एकत्रित कांग्रेस के विधायक समारोह के बाद सचिन पायलट के नेतृत्व में हरियाणा के मानेसर के लिए रवाना की योजना थी, लेकिन सीएम गहलोत ने 10 जून को ही राजस्थान की सीमा सील कर पायलट की योजना फेल कर दी। यह बात मैंने तब लिखी जब किसी भी अखबार में ऐसा नहीं लिखा गया। मेरी पत्रकारिता का सच यह भी है कि मैंने तब ऐसी सच्चाई लिखी जब खुद सचिन पायलट ऐसी योजना से इंकार कर रहे थे। 12 जून को जयपुर में सीएम गहलोत के साथ जो संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई उसमें पायलट ने सफेद झूठ बोला कि कांग्रेस में कोई बगावत नहीं है। लेकिन इसके बावजूद भी मैंने ब्लॉग में पूरी योजना को विस्तार से लिखा। यह ब्लॉग आज भी मेरे फेसबुक पेज पर पढ़ा जा सकता है। जो बात 12 जून को मैंने लिखी, उसकी पुष्टि 20 जुलाई को सीएम गहलोत ने की। गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट तो 11 जून को ही विधायकों को दौसा से हरियाणा ले जा रहे थे, ताकि 19 जून को होने वाले राज्यसभा के चुनाव में कांग्रेस के एक उम्मीदवार को हराया जा सके। लेकिन मैंने पायलट की इस योजना को फेल कर दिया। सब जानते हैं कि 10 जून को सुबह राजस्थान की सीमा सील करने का आदेश निकाला गया, तब इसका कारण कोरोना संक्रमण को रोकना बताया गया, लेकिन अब सच्चाई स्वयं सीएम गहलोत ने स्वीकार कर ली है। यदि कोरोना की आड़ लेकर सीमा सील नहीं की जाती तो 11 जून को ही दौसा से कांगे्रस के विधायक मानेसर टेकऑफ कर जाते।







